
सपा मुखिया अखिलेश यादव
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भाजपा से मुकाबिल विपक्षी गठबंधन यूपी में अपनी गांठें अब तक नहीं कस पा रहा है। पीलीभीत में शुक्रवार को आयोजित समाजवादी पार्टी की पहली रैली में कमोबेश यही नजर आया। सपा मुखिया अखिलेश यादव ने जोरशोर से चुनावी शंखनाद तो किया, लेकिन अवाम तक गठबंधन की एकता का संदेश अपेक्षित मजबूती से नहीं पहुंचा पाए। पोस्टर तक सीमित कांग्रेस व अन्य नेताओं के चेहरों की कमी मंच पर खलती रही। पीलीभीत के कांग्रेस जिलाध्यक्ष को मंच पर जगह जरूर मिली लेकिन अखिलेश की रणनीति एकला चलो वाली ही नजर आई।
वर्ष-2017 के विधानसभा चुनाव में दो लड़कों के नारे से मशहूर हुई सपा मुखिया अखिलेश यादव और कांग्रेस नेता राहुल गांधी की जोड़ी उस समय भले ही कमाल न कर पाई हो, लेकिन एनडीए के खिलाफ एकजुट विपक्ष ने फिर से गठबंधन कर कमर कसी है। मेनका गांधी और वरुण गांधी की 35 साल तक कर्मभूमि रही पीलीभीत लोकसभा सीट पर सपा की पहली रैली में लोगों को उम्मीद थी कि कांग्रेस और सपा के नेता एक साथ मंच साझा कर प्रदेश को संदेश देंगे।
इसके पीछे सियासी पंडित तर्क भी लगा रहे थे कि वरुण का टिकट कटने के बाद सपा राहुल गांधी के जरिये मतदाताओं को साधने की कोशिश करेगी। चूंकि टिकट कटने के बाद वरुण ने भावुक पत्र लिखकर पीलीभीत की जनता को संदेश दिया था। हालांकि, उसके बाद से अब तक वे एक बार भी यहां नहीं पहुंचे हैं। ऐसे में भाजपा के खिलाफ यह बड़ा हथियार साबित हो सकता था।
