Railways generating 35% of consumed electricity from solar energy story varies from department to department

सौर ऊर्जा केंद्र (सांकेतिक)
– फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राजधानी लखनऊ में सौर ऊर्जा का इस्तेमाल करने के मामले में सरकारी विभाग एक ढर्रे पर नहीं हैं। रेलवे अपने कुल खपत की 35 फीसदी बिजली सौर ऊर्जा के दम पर पैदा कर रहा है। वहीं, पुलिस और प्रशासन दोनों के भवन सौर ऊर्जा से रोशन नहीं हैं। पुलिस के किसी कार्यालय में सोलर पैनल नहीं लगा है, जबकि कलेक्ट्रेट में वर्ष 2016 में पैनल तो लगे, लेकिन ये पूरी तरह निष्क्रिय हैं।


सौर ऊर्जा के इस्तेमाल के मामले में लखनऊ प्रदेश भर में पहले स्थान पर है। इस समय यहां रोजाना औसतन 350 घरों में सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित हो रहे हैं, लेकिन कई सरकारी विभागों ने अभी तक इसकी शुरुआत तक नहीं की है। जबकि सामान्य परिवार के मुकाबले सरकारी कार्यालयों का बिजली खर्च कई गुना है। सरकारी विभागों में सौर ऊर्जा का इस्तेमाल होने पर जनता के धन की बचत होगी, साथ ही शहर में बिजली की मांग भी कम होगी।

रेलवे सालाना बचा रहा चार करोड़

रेलवे ने काफी समय पहले सौर ऊर्जा का इस्तेमाल शुरू कर दिया था। यह पूरे मंडल में हर साल करीब चार करोड़ रुपये की बिजली सौर ऊर्जा से पैदा कर रहा है। उत्तर रेलवे में स्टेशन बिल्डिंग, रेलवे कॉलोनियों, लेवर क्रॉसिंग गेट, रेलवे वर्कशॉप, डिपो, अस्पतालों आदि में 2200 किलोवाट के सोलर पैनल लगे हैं। इनसे हर साल 30 से 35 लाख यूनिट बिजली का उत्पादन होता है। इस तरह से इनसे करीब 1.80 करोड़ रुपये बिजली के बिल की बचत होती है। पूर्वोत्तर रेलवे लखनऊ मंडल में 3500 किलोवाट के सोलर पैनल लगे हैं। इनसे सालाना 50 लाख यूनिट बिजली पैदा हो रही है और दो से 2.50 करोड़ रुपये की बचत होती है।



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