खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
फिरोजाबाद के शिकोहाबाद में खुशी और अरुण के प्रकरण में पुलिस की थ्योरी और पड़ोसियों के दावों के बीच एक बड़ा विरोधाभास है। इस खौफनाक कांड में जहां पुलिस का कहना है कि कंट्रोल रूम/थाने पर आग लगने की सूचना मिलने के बाद वे मौके पर पहुंचे थे, वहीं चश्मदीद पड़ोसियों ने पुलिस के दावों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा है कि पुलिस की दबिश और घेराबंदी के बाद ही डरे हुए प्रेमी जोड़े ने खुद को आग लगाई थी।
पड़ोसियों के अनुसार, शुक्रवार रात करीब 10 बजे खुशी और अरुण चोरी-छिपे इस बंद मकान पर पहुंचे थे। इसके करीब एक घंटे बाद, पुलिस की एक टीम आई थी। पुलिस को दरवाजे पर देख अंदर छिपे प्रेमी जोड़े में खलबली मची। इसके बाद दोनों ने आग लगा ली। अंदर से चीखें सुनकर पुलिसकर्मी बचाव को दौड़े। पूरा रेस्क्यू ऑपरेशन करीब 20 मिनट तक चला।
2 of 12
रसोई के भीतर रखे फ्रीज का टूटा हुआ गेट
– फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
फ्रिज का टूटा हुआ गेट और बिखरा सामान बयां कर रहे खौफनाक मंजर
प्रेमी जोड़े के रस्सी से पैर बांधकर आत्मदाह करने के मामले में घटनास्थल (रसोईघर) से दिल दहला देने वाले साक्ष्य फॉरेंसिक टीम को मिले हैं। पुलिस जांच में सामने आया है कि ज्वलनशील पदार्थ डालकर आग लगाने के बाद दोनों मौत की लपटों के बीच बेहद तड़पे थे।
3 of 12
इसी रसोई में प्रेमी युगल ने लगाई आग
– फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
रसोई का सामान पूरी तरह अस्त-व्यस्त मिला है और वहां रखे एक फ्रिज का गेट भी टूटा हुआ पाया गया है, जो इस बात की गवाही दे रहा है कि आग बुझाने और जान बचाने के लिए दोनों ने आखिरी वक्त में भारी छटपटाहट दिखाई थी।
4 of 12
सीओ शिकोहाबाद अमरीश कुमार व अन्य घटनास्थल पर शनिवाार सुबह पहुंचकर जांच करते हुए
– फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
पुलिस का अनुमान है कि जब आग की लपटों ने दोनों को घेरा, तो असहनीय दर्द के कारण वे खुद को बचाने के लिए वहां रखे सामान और फ्रिज से टकराकर बुरी तरह छटपटाए थे।
5 of 12
खुशी के घर के गेट पर ताला लगा होने के कारण बराबर के कमरे का गेट तोड़कर बचाने को पुलिस घर में घुसी।
– फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
खाली केन मिली, डीजल या केरोसिन… जांच शुरू
फिरोजाबाद पुलिस और फॉरेंसिक टीम को मौके से तेल की एक खाली केन तो मिली है लेकिन अभी तक यह पूरी तरह साफ नहीं हो सका है कि आग लगाने के लिए डीजल का इस्तेमाल किया गया था या फिर केरोसिन (मिट्टी का तेल) का।