शादी वाले घरों को सिलिंडर पहुंचाने के प्रशासन के दावे एक बार फिर से खारिज हो गए हैं। सोमवार को जिन घरों में शादी थी उनके यहां भी सिलिंडर नहीं पहुंचे। मजबूरन कैटरर्स ने भट्ठी जलाकर काम चलाया। कैटरिंग कारोबारियों ने मामले में आपत्ति जताई है जबकि जिम्मेदार अधिकारी उन्हें व्यवस्था ठीक किए जाने का भरोसा दे रहे हैं।
चिनहट के एक परिवार ने 14 अप्रैल को जिला पूर्ति अधिकारी को पत्र लिखकर बिटिया की शादी में 500 मेहमानों की दावत के लिए सिलिंडर की मांग की थी। दावत का जिम्मा अयोध्या रोड स्थित लॉन को दिया। हैरानी की बात यह कि 20 अप्रैल को शादी वाले दिन तक भी सिलिंडर नहीं मिले। मजबूरन कैटरिंग कारोबारी रवि ने भट्ठियों के सहारे ही अपना वादा पूरा निभाया। बताया कि शादी के कार्ड के साथ आवेदन पत्र पूर्ति कार्यालय में दिया गया था। सोमवार को भी दफ्तरों के चक्कर लगाए लेकिन सिलिंडर नहीं मिल सके।
इसी तरह विनीतखंड गोमतीनगर निवासी एक परिवार ने 9 अप्रैल को बेटे की शादी की दावत के लिए 20 सिलिंडर की मांग की थी। विराटखंड स्थित सामुदायिक केंद्र के आरक्षण का प्रमाणपत्र भी दिया लेकिन सिर्फ चार सिलिंडर ही मिल सके। इससे कैटरिंग कारोबारियों ने भट्ठी के भरोसे ही अपना वादा निभाया।
वहीं, गणपति विहार के एक शादी वाले परिवार ने भी 21 अप्रैल को बिटिया की शादी के लिए जिला आपूर्ति अधिकारी को पत्र लिखा। आधार कार्ड और शादी के कार्ड के साथ 800 मेहमानों के लिए 10 सिलिंडर की मांग की गई। लेकिन उन्हें भी सिलिंडर नहीं मिल सके।
सबसे साथ हो समान व्यवहार
उत्तर प्रदेश टेंट कैटरर्स एंड डेकोरेटर वेलफेयर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष विजय कुमार ने बताया कि प्रशासन ने शादी वाले घर के लिए आठ व्यावसायिक सिलिंडरों की संख्या नियत की थी लेकिन मिल नहीं रहे हैं। सोमवार को शादी वाले घरों में सिलिंडर ही नहीं पहुंचे। भट्ठी और चूल्हों पर काम हुआ। देर शाम तीन सिलिंडर भिजवाए गए। वीाईपी लोगों के लिए वीआईपी व्यवस्था लागू कर दी जा रही है। जिस तरह वीआईपी लोगों को तरजीह दी जा रही है उसी तरह आम लोगों को भी राहत दी जाए।
