लखनऊ। दशलक्षण महापर्व के दसवें और अंतिम दिन शुक्रवार को शहर के जैन मंदिरों में भक्ति व साधना का माहौल रहा। कहीं 108 स्वर्ण कलशों से भगवान का अभिषेक हुआ तो कहीं शांतिधारा और हवन के साथ पर्व की पूर्णाहुति की गई। श्रद्धालुओं ने उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म की आराधना करते हुए मन, वचन और कर्म से विकारों का त्याग कर आत्मसंयम और पवित्रता अपनाने का संकल्प लिया। इस दौरान भगवान वासुपूज्य के मोक्ष कल्याणक और अनंत चतुर्दशी पर भगवान अनंतनाथ की विशेष पूजा भी हुई।

इंदिरानगर स्थित जैन मंदिर में उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म और भगवान वासुपूज्य का मोक्ष कल्याणक मनाया गया। अभिषेक जैन ने बताया कि प्रात:काल भक्तों ने भगवान वासुपूज्य को पांडुशिला पर विराजमान कर 108 स्वर्ण कलशों से रिद्धि-सिद्धि मंत्रों के साथ अभिषेक किया।

गोमती नगर स्थित जैन मंदिर में भी उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म की पूजा धूमधाम से हुई। सांगानेर से आए पंडित जैन शास्त्री ने भगवान का अभिषेक कराया। उन्होंने कहा कि शरीर से सुख पाने की लालसा जीवन का विनाश करती है। सच्चा ब्रह्मचर्य तभी मिलेगा जब हर स्त्री और पुरुष एक-दूसरे को सम्मान और पवित्रता की दृष्टि से देखें। आलोक जैन ने बताया कि अनंत चतुर्दशी होने से भगवान अनंतनाथ की भी विशेष पूजा हुई। साथ ही 1008 वासुपूज्य भगवान का मोक्ष कल्याणक मनाया गया और लड्डू अर्पित किए गए। इस अवसर पर लखनऊ जैन प्रवर्धनी सभा के अध्यक्ष एवं पूर्व डीजीपी एके जैन ने विद्वानों को सम्मानित किया।

आशियाना स्थित दिगंबर जैन मंदिर एवं धर्मशाला में विहसंत सागर जी महाराज ने उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म की महत्ता बताई। उन्होंने कहा कि मन, वचन और कर्म से विषय वासनाओं का त्याग कर आत्मसंयम एवं पवित्रता को अपनाना ही उत्तम ब्रह्मचर्य है। इसके साथ ही जैन धर्म के बारहवें तीर्थंकर भगवान वासुपूज्य का मोक्ष कल्याणक भी श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ मनाया गया। मीडिया प्रभारी सिद्धार्थ जैन ने बताया कि दशलक्षण महापर्व के समापन के बाद 27 सितंबर को उत्तम क्षमावाणी पर्व श्रद्धाभाव के साथ मनाया जाएगा।

दशलक्षण महापर्व के अंतिम दिन शहर के जैन मंदिरों में अभिषेक, शांतिधारा और धार्मिक अनुष्ठान

दशलक्षण महापर्व के अंतिम दिन शहर के जैन मंदिरों में अभिषेक, शांतिधारा और धार्मिक अनुष्ठान



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