लखनऊ। राजधानी के 88 गांवों में पेयजल संकट पर हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने राज्य सरकार को संवेदनशीलता से काम करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि पानी जीवन की मूलभूत आवश्यकता है। इस समस्या के स्थायी समाधान में देरी नहीं होनी चाहिए। सरकार पांच वाटर ट्रीटमेंट प्लांटों पर जल्द निर्णय लेकर इसे आगे की कार्रवाई के लिए यूपी जल निगम (नगरीय) को सूचित करे। अगली सुनवाई 28 अक्तूबर को होगी। एसडीएम को पेश होकर मामले में प्रगति की जानकारी देने का निर्देश दिया गया है।

न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ल की खंडपीठ ने यह आदेश उत्कर्ष लोक सेवा संस्थान की जनहित याचिका पर दिया। पिछली सुनवाई पर कोर्ट को बताया गया था कि एक वाटर ट्रीटमेंट प्लांट के लिए बख्शी का तालाब के नगवामऊ गांव में जमीन मिल चुकी है। हालांकि, प्रशासनिक और वित्तीय मंजूरी लंबित है। बाकी चार प्लांटों के लिए अभी जमीन आवंटित नहीं हुई है। कोर्ट ने डीएम को इस काम को प्राथमिकता पर रखने के लिए कहा था।

कोर्ट ने जल संकट से तत्काल राहत के लिए 30 झीलों के पुनरुद्धार पर भी जल्द निर्णय लेने का निर्देश दिया था। पूर्व आदेश के तहत 90 झीलों का निरीक्षण किया गया था। इनमें से 30 को पुनरुद्धार के लिए उपयुक्त पाया गया। जल निगम (नगरीय) की रिपोर्ट नगर विकास विभाग को भेजी जा चुकी है। इस पर सरकार का निर्णय आना है।



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