आगरा। क्रिकेट मैच में अब तक मौसम बाधा डालता ही रहा है। पर, शनिवार को साउथैम्पटन में भारत और इंग्लैंड के बीच पांचवें टी-20 मुकाबले का सबसे सड़क का जाम बाधा बन गया। भारतीय टीम की बस जाम में फंस गई, खिलाड़ी समय पर स्टेडियम वक्त से नहीं पहुंच सके और मुकाबले की शुरुआत निर्धारित समय से देर से हुई। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में बेहद दुर्लभ इस घटना ने दुनियाभर के खेल आयोजकों का ध्यान ट्रैफिक प्रबंधन की ओर खींचा है।
ताजनगरी आगरा के लिए भी यह किसी चेतावनी से कम नहीं है, क्योंकि शहर में क्रिकेट समेत कई खेलों की गतिविधियां तेजी से बढ़ रही हैं और 24 जुलाई को उत्तर प्रदेश प्रीमियर लीग (यूपीपीएल) का महत्वपूर्ण आयोजन भी प्रस्तावित है। आगरा में भगवान टॉकीज, सिकंदरा, गुरु का ताल, एमजी रोड, रामबाग आदि मार्गों पर लगने वाला जाम किसी से छिपा नहीं है। कई बार जिलास्तरीय क्रिकेट, फुटबाल और अन्य प्रतियोगिताओं में खिलाड़ियों, अंपायरों और अधिकारियों को समय से पहले निकलना पड़ता है, फिर भी मैदान तक पहुंचने में देरी हो जाती है। बड़े आयोजनों के दौरान यह चुनौती और बढ़ जाती है। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट भी ट्रैफिक की मार झेल सकता है तो आगरा को भविष्य की मेजबानी के लिए अभी से तैयारी करनी होगी। केवल आधुनिक मैदान और बेहतर सुविधाएं ही काफी नहीं होंगी, बल्कि खिलाड़ियों और टीमों के लिए निर्बाध यातायात व्यवस्था भी उतनी ही जरूरी होगी।
पूर्व क्रिकेट पराग गौतम ने कहा कि साउथैम्पटन की घटना केवल क्रिकेट की खबर नहीं, बल्कि हर उस शहर के लिए चेतावनी है जहां खेल गतिविधियां तेजी से बढ़ रही हैं। आगरा में बड़े टूर्नामेंटों के लिए पहले से ट्रैफिक प्लान तैयार होना चाहिए, ताकि खिलाड़ी और अधिकारी बिना किसी बाधा के समय पर मैदान पहुंच सकें।
आगरा क्रिकेट संघ के अध्यक्ष सुनील जोशन ने कहा, आगरा क्रिकेट का बड़ा केंद्र बनता जा रहा है। आने वाले समय में बड़े टूर्नामेंट और ट्रायल होंगे। ऐसे में आयोजन की योजना बनाते समय ट्रैफिक प्रबंधन को भी उतनी ही प्राथमिकता देनी होगी, जितनी मैदान और अन्य व्यवस्थाओं को दी जाती है। रवि जादौन, क्रिकेट प्रशासक, ने कहा कि एक खिलाड़ी महीनों मेहनत करता है। अगर वह जाम में फंसकर समय पर मैदान नहीं पहुंच पाए तो उसकी तैयारी प्रभावित होती है।
