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शंखनाद, घंटे घड़ियालों की गूंज और हर हर महादेव के जयकारों के बीच शुक्रवार से सावन माह का शुभारंभ हो गया। शहर के प्रमुख शिवालयों में एक दिन पहले से ही धार्मिक अनुष्ठान शुरु हो चुके हैं और हर कोना शिवमय हो उठा है। मंदिरों के बाहर बेलपत्र, भांग, धतूरा और पूजा सामग्री से सजी दुकानों पर श्रद्धालुओं की भीड़ देखी जा सकती है। कोनेश्वर, मनकामेश्वर, बुद्धेश्वर और राजेंद्रनगर स्थित महाकाल मंदिर में भक्तों का उत्साह चरम पर है। हर मंदिर की अपनी कथा, अपनी आस्था, और अपनी विशेष तैयारी है।

कोनेश्वर मंदिर: 25 ब्राह्मणों से होगा पूरे माह पाठ

चौक स्थित प्राचीन कोनेश्वर मंदिर में भगवान शिव के विशेष पाठ की शुरुआत बृहस्पतिवार शाम 7 बजे से की गई। मंदिर के पुजारी अमर नाथ ने बताया, पूरे माह 25 ब्राह्मण रोजाना शाम 7 से रात 9 बजे तक शिव पाठ करेंगे, जिसके बाद भव्य आरती होगी। श्रद्धालुओं के लिए हर सोमवार को ठंडाई का वितरण किया जाएगा। मंदिर में किए गए अद्भुत श्रृंगार को देखने के लिए दूर-दराज से लोग आ रहे हैं। ऐसी मान्यता है कि 40 दिनों तक नियमित शिवलिंग पर जलाभिषेक करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं।




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लखनऊ का बुद्धेश्वर महादेव मंदिर।
– फोटो : amar ujala


बुद्धेश्वर महादेव मंदिर: हर दिन अलग श्रृंगार, विशेष भोजन प्रसाद

मोहन रोड स्थित बुद्धेश्वर महादेव मंदिर में इस बार भक्तों को हर दिन भगवान शिव का नया स्वरूप देखने को मिलेगा। मंदिर के पंडित रामपुरी महाराज ने बताया कि एक विशेष ‘श्रृंगार समिति’ बनाई गई है जो महाकाल का भव्य श्रृंगार उनके प्रिय फल, फूल और पत्तों से करेगी। श्रद्धालुओं के लिए हर दिन विभिन्न प्रकार के भोजन प्रसाद की व्यवस्था भी की गई है। पौराणिक मान्यता है कि राम-लक्ष्मण और सीता ने वनवास के दौरान इसी स्थान पर भगवान शिव की पूजा की थी।


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महाकाल मंदिर में हुआ श्रृंगार (फाइल फोटो)
– फोटो : amar ujala


महाकाल मंदिर में उज्जैन के भस्म आरती की झलक

राजेंद्रनगर स्थित महाकाल मंदिर इस बार उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर की तर्ज पर आयोजन कर रहा है। मंदिर समिति के महामंत्री गिरीश चंद्र ने बताया कि हर दिन तीन रुद्राभिषेक और भस्म आरती होंगी। सुबह 4 से 7 बजे तक आरती के विशेष आयोजन के साथ। मंदिर को लाइटों और फूलों से सजाया गया है। 24 जुलाई को बाबा महाकाल नगर भ्रमण के लिए पालकी में विराजमान होकर निकलेंगे। मंदिर में भगवान शिव की दक्षिणमुखी प्रतिमा स्थापित है, जो इसे उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर से जोड़ती है। शनिवार को भक्तों की भारी भीड़ होती है।


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लखनऊ का मनकामेश्वर मंदिर।
– फोटो : amar ujala


मनकामेश्वर मंदिरः सुरक्षा चाक-चौबंद

गोमती नदी के तट पर स्थित लगभग 1000 वर्ष पुराना मनकामेश्वर मंदिर इस बार सावन के पहले सोमवार को 1 लाख से अधिक भक्तों के स्वागत को तैयार है। मंदिर की महंत देव्या गिरी ने बताया, दिव्यांग और वृद्ध श्रद्धालुओं के लिए अलग प्रवेश द्वार, प्राथमिक उपचार व्यवस्था और 100 से अधिक स्वयंसेवकों को तैनाती की गई है। मंदिर के कपाट सोमवार को सुबह 5 बजे खुलेंगे और दोपहर 12 बजे तक दर्शन होंगे। इसके बाद दोपहर 3 बजे से रात 10:30 बजे तक फिर से श्रद्धालु बाबा के दर्शन कर सकेंगे। हर दिन भक्तों में प्रसाद वितरित किया जाएगा। पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान लक्ष्मण ने इसी स्थान पर भगवान शिव की प्रार्थना की थी। यहां मनोकामना पूरी होने की मान्यता है। इसी वजह से इसका नाम मनकामेश्वर पड़ा है। मनोकामना पूरी होने पर भक्त भगवान का श्रृंगार करते हैं।


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– फोटो : amar ujala


सावन माह के पहले सोमवार (14 जुलाई) के लिए शुभ मुहूर्त

ब्रहम मुहूर्तः सुबह 4:16 से 5:04 तक

अभिजीत मुहूर्तः दोपहर 12:05 से 12:58 तक

अमृत कालः दोपहर 12:01 से 1:39 तक

प्रदोष कालः शाम 5:38 से 7:22 तक




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