स्कूल समय में एलकेजी की छात्रा को मच्छर के काटने पर उसके पिता ने डीएम को ई-मेल भेज कर शिकायत की है। शिकायतकर्ता का कहना है कि बार-बार उसकी बेटी को मच्छर काट रहे हैं। स्कूल को बताने के बाद भी सुनवाई नहीं हुई।
उनका कहना है कि जब वह पूरी फीस देते हैं तो स्कूल प्रबंधन बच्चों को स्वच्छ माहौल क्यों नहीं दे पा रहा है। डीआईओएस का कहना है कि डीपीआरओ को पत्र भेजकर जिले के सभी स्कूलों में फॉगिंग करवाए जाने के लिए कहा जाएगा।
अमेटी विश्वविद्यालय नोएडा के असि. प्रोफेसर द्वितीय डॉ. सोनू सिंह ने 19 अगस्त को जिलाधिकारी डॉ. राजेंद्र पैंसिया को भेजे ई-मेल में कहा कि उनकी बेटी एलकेजी की छात्रा है।
चूंकि वह स्वयं आठ वर्षों तक अमेरिका में न्यूरोसाइंटिस्ट के तौर पर काम कर चुके हैं, इसलिए मच्छर जनित रोगों की गंभीरता और बार-बार मच्छरों के संपर्क में आने से जुड़े संभावित स्वास्थ्य जोखिमों को भलीभांति समझते हैं।
उनका कहना है कि जब पहली बार बेटी को स्कूल में मच्छर ने काटा था तो इसकी शिकायत स्कूल डायरी में विद्यालय प्रशासन से की थी, इसके बावजूद स्कूल की ओर से कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई है। इसके बाद बेटी को दोबारा मच्छर ने काट लिया।
डीएम को मच्छर के काटने से बने निशान की तस्वीरें भेजते हुए उन्होंने कहा कि यह स्थिति मामूली असुविधा नहीं है। मच्छरों के संपर्क में आने से डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया और अन्य मच्छर जनित संक्रमण हो सकते हैं, खासकर जब बच्चे लगातार ऐसे वातावरण में रहते हैं जहां मच्छर नियंत्रण के उपाय स्पष्ट रूप से लागू नहीं किए जा रहे हैं।
डीएम से की गई शिकायत में कहा गया है कि अभिभावक होने के नाते हम अपने बच्चों को विद्यालय के भरोसे छोड़ते हैं और यह आशा करते हैं कि विद्यालय उन्हें स्कूल के समय के दौरान एक सुरक्षित, स्वच्छ और उचित रूप से संरक्षित वातावरण प्रदान करेगा।
हम निर्धारित विद्यालय शुल्क का पूर्ण भुगतान करते हैं और विद्यालय प्रबंधन से अपेक्षा करते हैं कि वह हमारे बच्चों की सुरक्षा और कल्याण के प्रति अपनी उचित जिम्मेदारी निभाए। इसलिए यह बेहद निराशाजनक और दुखद है कि इस मामले को पहले ही स्कूल के ध्यान में लाए जाने के बावजूद समस्या स्पष्ट रूप से जारी है।
मच्छरों की समस्या किसी भी स्कूल में नहीं होनी चाहिए। इसके लिए डीपीआरओ को पत्र भेजकर जनपद के सभी स्कूलों में फॉगिंग करवाए जाने का अनुरोध किया जाएगा, ताकि संचारी रोग पर नियंत्रण लग सके। रितु तोमर, जिला विद्यालय निरीक्षक
