युवाओं को नजरिया बदलना चाहिए। वह जॉब सीकर (नौकरी ढूंढने वाला) नहीं, बल्कि जॉब प्रोवाइडर (नौकरी देने वाला) बनें। उद्योग व युवाओं के बीच समन्वय हो।



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