राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू एक गैंग बनाकर वीआईपी दर्शन करवाने के खेल में हर महीने लाखों रुपये की वसूली करता था। जेल गए आरोपी उसके गैंग के साथी थे। रोजाना रकम का बंटवारा होता था। यह खेल प्राण प्रतिष्ठा के बाद से अधिक बढ़ गया था। एसआईटी जांच में इसका खुलासा हुआ है। इसमें मंदिर के कई और कर्मचारी व कुछ बाहरी लोगों पर शिकंजा कस सकता है।
दरअसल, राम मंदिर में दर्शन की कई व्यवस्थाएं हैं। सामान्य श्रद्धालु कतारों में खड़े होकर दर्शन करते हैं। इसमें काफी वक्त लगता है। वहीं, वीआईपी प्रोटोकॉल से आए श्रद्धालुओं को चंद मिनट में दर्शन हो जाते हैं। इसके लिए वीआईपी पास ट्रस्ट की ओर से जारी किए जाते हैं, जो निशुल्क हैं। लेकिन इसी में यह पूरा खेल होता था। श्रद्धालुओं को आसानी से भव्य दर्शन करवाने की बात बताकर उनसे रुपये वसूले जाते थे।
होटल, होम स्टे वालों के जरिये फैला जाल
जेल भेजे गए आरोपियों ने अयोध्या के दर्जनों होटल, होम स्टे और धर्मशालाओं में संपर्क कर रखा था। वहां ठहरने वाले श्रद्धालुओं से होटल या होम स्टे मालिक वीआईपी दर्शन करवाने की बात करते थे। प्रति श्रद्धालु 500 से 1000 रुपये तक आमतौर पर वसूले जाते थे। जब देखते थे कि कोई श्रद्धालु आर्थिक रूप से अधिक मजबूत है, तो उससे दो-दो हजार या उससे भी अधिक रकम लेते थे। उसके बाद ये सभी टिन्नू एंड कंपनी से संपर्क कर श्रद्धालुओं की डिटेल साझा करते थे। ये सभी उनके वीआईपी पास बनवाकर दर्शन करवाते थे।
चंद मिनट में तैयार करते थे पास
होटल आदि के जरिये श्रद्धालुओं को लाने की जिम्मेदारी अनुकल्प, करुणेश, मनीष, अविनाश और लवकुश आदि की रहती थी। फिर टिन्नू पास बनाता था। क्योंकि टिन्नू को पास बनाने का अधिकार तो नहीं था, लेकिन वह चंपत, अनिल मिश्र और गोपाल राव की आईडी का इस्तेमाल कर पास बना देता था। इन छह के अलावा कई और वहां के कर्मी इस पूरे खेल में शामिल हैं।
छोटू बड़ा खिलाड़ी, विशेष अवसरों पर इनकी होती थी चांदी
मंदिर के वीआईपी रूट व गेट के पास एक नाम सबसे अधिक चर्चा में रहता है, वह है छोटू का। वहां यह कहा जाता है कि जिस किसी को वीआईपी दर्शन करने हों, वह छोटू से संपर्क करे, तत्काल हो जाएगा। क्योंकि छोटू ने भी टिन्नू व अन्य कई लोगों से संपर्क बना रखा है। रकम लेकर दर्शन करवाता है और फिर रकम का बंटवारा होता है।
