पूर्णिमा पर चंद्रग्रहण रहेगा। ग्रहण का सूतक नौ घंटे पहले लग जाएगा। आचार्य शांतनु पांडेय के अनुसार, इस बार सौ साल बाद पितृ पक्ष में चंद्रग्रहण एवं सूर्य ग्रहण का दुर्लभ संयोग है। हालांकि सूर्य ग्रहण भारत में नजर नहीं आएगा। यह विदेश में रहेगा। उनके अनुसार पूर्णिमा पर चंद्रग्रहण रात्रि 9:57 बजे से शुरू है और मोक्ष रात्रि 1:27 बजे होगा। रविवार सात सितंबर पूर्णिमा को रात्रि 9:57 बजे से चंद्रग्रहण प्रारंभ होगा। काशी पंचांग के अनुसार, ग्रहण का सूतक दोपहर 12:58 बजे से प्रारंभ हो जाएगा। पूर्णिमा का श्राद्ध दोपहर 12:30 बजे तक कर लें। चंद्रग्रहण रविवार रात में 3.29 घंटे का रहेगा।
ग्रहण काल में यह है वर्जित
धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दौरान किसी भी तरह के शुभ कार्य, पूजा-पाठ, खरीदारी या मंदिर दर्शन करना वर्जित माना गया है। ज्योतिषियों की मानें तो आज दोपहर 12 बजकर 59 मिनट से पहले ही श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान और पवित्र नदियों में स्नान जैसे धार्मिक कार्य पूरे कर लेने चाहिए। मान्यता है कि ऐसा करने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है और घर-परिवार पर उनका आशीर्वाद बना रहता है। ग्रहण काल में सोना, खाना और पीना नहीं करना चाहिए। गर्भवती महिला को भी नहीं सोना चाहिए। खाने की चीजों में तुलसी पत्र डाल देना चाहिए। हालांकि बालक, वृद्ध और रोगी ग्रहणकाल से मुक्त होते हैं।
ज्योतिषाचार्य पंडित महेश प्रसाद मिश्र ने बताया कि चंद्रग्रहण आज रविवार रात्रि 9:57 बजे शुरू होगा, जिसका मध्य 11:40 बजे और मोक्ष देर रात 1:26 बजे होगा। यानी चंद्रग्रहण रविवार रात 9:57 बजे से रात्रि 1:26 बजे तक तीन घंटा 29 मिनट का होगा। सूतक काल 12:57 बजे से शुरू हो जाएगा। शास्त्रों के अनुसार बालक, वृद्ध और रोगी के लिए सूतक काल शाम 6:57 बजे से माना जाएगा। सूतक काल के दौरान मूर्ति स्पर्श, पूजा, पाठ, ध्यान, भोजन आदि निषेध माने गए हैं।
राशियों पर रहेगा प्रभाव
पूर्व भाद्रपद नक्षत्र पर ग्रहण होने से ग्रहण की राशि इस बार कुंभ मानी गई है। इसके चलते धनु, कन्या, मेष, वृष, तुला, राशि वालों को यह ग्रहण फलदायक रहेगा। जबकि मिथुन, सिंह राशि वालों के लिए यह मिश्रित फलदायक यानी मध्यम फल देने वाला रहेगा। वृश्चिक, मीन, कुंभ, कर्क, मकर, राशि वालों के लिए शुभ फल देने वाला नहीं रहेगा। अशुभ फल देने वाली राशि के लोगों यह ग्रहण नहीं देखना चाहिए। लोगों को गुरु मंत्र, गायत्री व महामृत्युंजय मंत्र का जप करना चाहिए।
