– स्वच्छ रखने के लिए आमजन से भी की गई आगे आने की अपील
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। मंडलायुक्त विमल कुमार दुबे ने कहा कि पहूज नदी का वैज्ञानिक सर्वे कराया जाएगा। जिसके जरिये नदी के संरक्षण और संवर्द्धन के उपाय खोजे जाएंगे। सर्वेक्षण की रिपोर्ट के आधार पर नदी के पुनरुद्धार की कार्ययोजना तैयार की जाएगी। यह बात उन्होंने शनिवार को अमर उजाला की ओर से आयोजित कार्यक्रम में कही। साथ ही उन्होंने जल स्रोतों को स्वच्छ रखने के लिए आम जन से भी आगे आने की अपील की।
राजकीय संग्रहालय में आयोजित कार्यक्रम में सेवानिवृत्त आईएएस डॉ. पीके अग्रवाल ने पहूज नदी के पुनरुद्धार के लिए इसका वैज्ञानिक सर्वे कराने का सुझाव दिया था, जिस पर सहमति जताते हुए मंडलायुक्त विमल कुमार दुबे ने कहा कि किसी एजेंसी के माध्यम से जल्द नदी का वैज्ञानिक सर्वे कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि जल स्रोतों व जल को बचाने के लिए लोगों की जीवन चर्या में बदलाव करना होगा। लोग घर की पूजन-हवन सामग्री को नदी में विसर्जित कर देते हैं।
उन्होंने बताया कि गीता में लिखा है कि कोई व्यक्ति किसी चीज का प्रयोग करता है, लेकिन उसका संरक्षण-संवर्द्धन नहीं करता तो वह चोर है। पानी का हम प्रयोग करते हैं और उसको बचाते नहीं तो हम चोरी के भागी बन रहे हैं। साथ ही उन्होंने निबंध प्रतियोगिता में भाग लेने वाले बच्चों को प्रोत्साहित करते हुए अपना संस्मरण सुनाया। बताया कि 11वीं कक्षा में पढ़ते हुए उन्होंने महात्मा गांधी पर आधारित निबंध प्रतियोगिता में हिस्सा लिया था। प्रतियोगिता से पहले उनके बारे में बहुत पढ़ा था, जिसका नतीजा यह हुआ था कि वे विज्ञान के छात्र से राजनीति विज्ञान के छात्र बन गए थे।
प्रतियोगिता में इतनी बड़ी संख्या में बच्चों का प्रतिभाग करना साबित करता है कि नई पीढ़ी पानी के मुद्दे पर संवेदनशील हो रही है। यह अमर उजाला के अभियान की सार्थकता है। वन संरक्षक महावीर कौजालगी ने कहा कि प्रकृति को बचाने के लिए जल स्रोतों को बचाना बेहद जरूरी है। इसके अलावा पहले हम प्रदूषण के स्रोत पहचानने होंगे और इसके बाद रोकथाम के उपाय करने होंगे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए सामाजिक संस्था परमार्थ के सचिव डॉ. संजय सिंह ने कहा कि पहूज नदी के पुनरुद्धार हो जाने तक यह अभियान लगातार जारी रहेगा।
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नृत्य नाटिका के जरिये दिया संरक्षण का संदेश
कार्यक्रम के दौरान राधा एंड पार्टी के कलाकारों ने नृत्य नाटिका के जरिये पहूज नदी के संरक्षण का संदेश दिया। नाटिका में दर्शाया गया कि कोई नदी में घर का कचरा डाल रहा है तो कोई बर्तन और कपड़े धो रहा है। कलाकारों ने ऐसे लोगों की समझाइश की। पहूज नदी का रूप धारण कर आई कलाकार ने अपनी पीड़ा बताई। इस नृत्य नाटिका को खूब सराहा गया।
