इटावा। जिले के 26 सरकारी पशु चिकित्सालयों में डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की कमी का खामियाजा करीब 6.55 लाख पशुओं के पालकों को उठाना पड़ रहा है। केवल 18 पशु चिकित्साधिकारी होने के कारण कई अस्पतालों में नियमित इलाज प्रभावित है। शुक्रवार को संवाद न्यूज एजेंसी की पड़ताल में कई अस्पतालों पर ताला लटका मिला तो कई में पशुपालक डाॅक्टरों व स्टाफ का इंतजार करते दिखे। सरकारी अभियानों में डॉक्टरों की ड्यूटी लगने के कारण लोग मजबूरी में झोलाछाप से पशुओं का इलाज करा रहे हैं।

जिले में 26 सरकारी पशु चिकित्सालय संचालित हैं, लेकिन इनमें केवल 18 पशु चिकित्साधिकारी, 22 पशुधन प्रसार अधिकारी और 11 फार्मासिस्ट ही तैनात हैं। कई अस्पतालों में डॉक्टरों के साथ पैरामेडिकल स्टाफ के पद भी लंबे समय से खाली हैं। ऐसे में एक-एक डॉक्टर को अस्पताल, टीकाकरण अभियान, गोशालाओं के निरीक्षण और फील्ड ड्यूटी की जिम्मेदारी एक साथ निभानी पड़ रही है। इसका सीधा असर इलाज और टीकाकरण सेवाओं पर पड़ रहा है। पशुपालन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक जिले में करीब 6.55 लाख पशुधन है, जिनमें लग 92 हजार गाय और 3.15 लाख भैंसें शामिल हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि सरकारी व्यवस्था की कमजोरी का फायदा झोलाछाप पशु चिकित्सक खुलेआम उठा रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में बिना किसी मान्यता के कई लोग इलाज के नाम पर पशुओं को इंजेक्शन और दवाएं दे रहे हैं। पशुपालकों का कहना है कि मजबूरी में उन्हें इन्हीं लोगों पर भरोसा करना पड़ता है, क्योंकि सरकारी अस्पतालों में डॉक्टर नहीं मिलते। झोलाछाप के इलाज से कई बार पशुओं की जान तक चली जाती है।

सहसों निवासी शिवराम ने बताया कि पशु अस्पताल में अधिकतर समय ताला लगा रहता है। दो पशु हैं, अभी तक टीकाकरण नहीं हुआ। मजबूरी में बाहर से इलाज कराना पड़ेगा।

भैंस को टीका लगवाने उदी पशु अस्पताल पहुंचे भूरे ने बताया कि यहां डॉक्टर ही नहीं है। अक्सर यही हाल रहता है। मजबूरी में निजी पशु चिकित्सकों का सहारा लेना पड़ता है।

केस- एक

सहसों अस्पताल पर लटका ताला

चकरनगर। बीहड़ क्षेत्र के सहसों पशु अस्पताल में शुक्रवार को ताला लटका मिला। इलाज कराने पहुंचे पशुपालक बिना उपचार लौट गए। पशु चिकित्साधिकारी डॉ. अशोक कुमार ने बताया कि अस्पताल में डॉक्टर, फार्मासिस्ट और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के पद रिक्त हैं। केवल एक कर्मचारी तैनात है, जो नियमित रूप से नहीं आता। उसका तीन माह का वेतन रुका हुआ है। (संवाद)

केस-दो

डॉक्टर नहीं, इंतजार करते रहे पशुपालक

भरथना। नगर में स्थित पशु चिकित्सालय में दोपहर के समय केवल महिला सफाईकर्मी मिलीं। बताया गया कि डॉक्टर और स्टाफ टीकाकरण अभियान के लिए फील्ड पर हैं। अस्पताल में मिलीं बीना देवी ने बताया कि वह अपने बकरे के टीकाकरण के लिए डॉक्टर का इंतजार कर रही हैं। पशु चिकित्साधिकारी डॉ. बीएस वर्मा ने स्टाफ की कमी स्वीकार की। उन्होंने कहा कि स्टॉफ कम होने से परेशानी तो होती ही है। (संवाद)

केस-तीन

तीन कर्मचारियों के भरोसे अस्पताल

उदी। राजकीय पशु चिकित्सालय में महज तीन कर्मचारियों के भरोसे अस्पताल और फील्ड का पूरा काम चल रहा है। चिकित्साधिकारी डॉ. संदीप शर्मा मौके पर नहीं मिले। कर्मचारियों ने बताया कि वह फील्ड में पशुओं के उपचार एवं विभागीय कार्य के लिए गए हुए हैं। वहींए चिकित्साधिकारी ने बताया कि टीकाकरण अभियान चल रहा है उसी में टीम के साथ लगे हैं। इस दाैरान भैंस को टीका लगवाने आया पशुपालक परिसर में ही इंतजार करता मिला। (संवाद)

वर्जन

विभाग में पशु डॉक्टरों, फार्मासिस्ट व सहायकों की कमी है। जिले में भी यही हालात है, 26 अस्पतालों के सापेक्ष डॉक्टरों नहीं है। एक-एक डॉक्टर पर कई-कई अस्पतालों का चार्ज है। सीमित संसाधनों में भी बेहतर करने का प्रयास किया जाता है। झोलाछापों पर कार्रवाई के लिए सीवीओ को अभियान चलाने का निर्देश देंगे।

-डॉ. विजयवीर चंद्रयाल, अपर निदेशक पशुपालन, कानपुर मंडल



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *