यूपी में कैबिनेट विस्तार हो गया है इसके बावजूद एक माननीय सदमें में हैं तो दूसरे कोप भवन में बैठे हैं। वहीं, एक संस्थान के मुखिया यूपी वापसी में सफल नहीं हुए तो मन मसोस कर बैठे हैं।

सदमे में माननीय

मंत्रिमंडल बंटवारे के बाद माननीय सदमे में हैं। कद्दावर विभाग के लिए दिल्ली की दर्जनों परिक्रमा कर चुके माननीय जहां मन मसोस कर बैठे हैं, वहीं दूसरे माननीय कोप भवन में बैठे हैं। उनके हिस्से में आए मंत्रालय के विभाजन का दर्द न केवल उन्हें चुभ रहा है बल्कि उनके समर्थक और हितैषी मंत्री भी हतप्रभ हैं। इस फैसले के बाद दो अन्य माननीय भी दहशत में हैं और मौन व्रत जैसी अवस्था में हैं।

मुखिया को लगा झटका

मूल रूप से यूपी और वर्तमान में बंगाल में कर्मभूमि वाले एक पढ़ाई-लिखाई वाले संस्थान के मुखिया को हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव जैसा झटका लगा है। दरअसल, मुखिया पूरी ताकत और शिद्दत से यूपी वापसी की कवायद में जुटे थे। किंतु बृहस्पतिवार को प्रदेश के तीन राज्य विवि की मुखिया के जारी पत्र में उनका नाम नहीं आने से वे खासे चिंतित हैं। उनके साथ ही उनके प्रदेश के खासमखास को भी झटका लगा है। हालांकि वे यह चर्चा करते देखे गए कि अभी उम्मीद खत्म नहीं हुई। मुखिया के लिए और भी मौके हैं।

परामर्शदाता बढ़ा रहे मुसीबत

सेहत सुधार से जुड़े एक विभाग के मुख्यालय में आधा दर्जन से ज्यादा परामर्शदाता तैनात हैं। कोई मुखिया का संदेशा सुनाने की जिम्मेदारी निभा रहा है तो कोई फाइल आगे बढ़ाने की। इसके बाद भी हालात बेपटरी हैं। मुख्यालय में डटे इन नौसिखिए परामर्शदाताओं को पता ही नहीं है कि कौन सी बात मुखिया को बतानी है और कौन सी नहीं। ऐसे में मुखिया खुद भन्नाए हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कार्यप्रणाली में सुधार नहीं हुआ तो सभी परामर्शदाता को हटा देंगे। इससे परामर्शदाताओं के होश उड़े हुए हैं।

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