– बिजौली में लगे सॉलिड वेस्ट प्रोसेसिंग प्लांट के गीले कूड़े से बननी है खाद
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। बिजौली के सॉलिड वेस्ट प्रोसेसिंग प्लांट के गीले कूड़े से खाद बनाने की योजना है। यहां पर रोजाना 300 टन तक कूड़ा निकलता है। अभी ये प्लांट ट्रायल पर चल रहा है। इसी बीच उठे विवाद के बीच नगर निगम प्रशासन ने यहां पर लीचेड (कूड़े से निकलने वाला प्रदूषित तरल) टैंक बनवा दिया है। कंपनी को भी कुछ निर्देश दिए गए हैं।
2007 में बिजौली में सॉलिड वेस्ट प्रोसेसिंग प्लांट शुरू हुआ था। कुछ साल से प्लांट चलने के बाद बंद हो गया। 2019 में स्वच्छ भारत मिशन 1.0 शहरी के तहत प्लांट के विस्तार का प्रस्ताव दिया गया। इसके बाद पीपीपी मॉडल पर यहां टिन शेड बढ़ाया गया। साथ ही कचरा डंप करने के लिए मैदान बनाया गया। प्लांट में गीला और सूखा कचरा अलग-अलग किया जाता है।
गीले कचरे से खाद बनाने की योजना है। जबकि, सूखे कचरे को सीमेंट फैक्ट्री में जलाया जाएगा। इसके लिए सीमेंट फैक्ट्री से अनुबंध भी हो गया है। बीते 20 अगस्त से प्लांट का ट्रायल शुरू हुआ है। बारिश शुरू होने के बाद से कूड़े का लीचेड बहने से तेज दुर्गंध आ रही है, जिससे क्षेत्रवासी प्लांट के विरोध में आ गए हैं। अब प्लांट का ठेका लेने वाली कंपनी से नगर निगम प्रशासन ने कहा है कि दुर्गंध को दबाने के लिए केमिकल डालें।
मच्छर-मक्खी न पनपें इसलिए, दवा का भी छिड़काव करें। नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. धीरेंद्र गुप्ता का कहना है कि प्लांट की क्षमता 320 टन है। यहां से प्रतिदिन 300 टन तक कूड़ा निकलता है। प्लांट में लीचेड टैंक बन गया है।
