ताखा। क्षेत्र में गेहूं के भूसे की कमी के चलते दामों में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। स्थिति यह है कि महज एक माह के अंदर भूसे के दाम 500 रुपये से बढ़कर 1200 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गए हैं। लगातार बढ़ते दामों से पशुपालकों की चिंता बढ़ गई है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि यही स्थिति बनी रही तो आने वाले दिनों में भूसे के दाम 2000 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच सकते हैं।

किसानों का कहना है इस साल गेहूं की कटाई के समय हुई बारिश ने भूसे को सबसे अधिक नुकसान पहुंचाया। खेतों में पड़े गेहूं के अवशेष बारिश से खराब हो गए जिससे भूसे का उत्पादन काफी घट गया। इसके अलावा हार्वेस्टर मशीनों से गेहूं की कटाई होने के कारण भी भूसे की भारी बर्बादी हुई।

किसानों का कहना है कि हार्वेस्टर से कटाई में लगभग 40 प्रतिशत तक भूसा नष्ट हो जाता है जबकि पारंपरिक तरीके से कटाई करने पर अधिक मात्रा में भूसा सुरक्षित रहता था। भूसे की कमी का असर अब सीधे पशुपालकों पर दिखाई देने लगा है। पशुओं के चारे की व्यवस्था करना मुश्किल हो रहा है।

ऊसराहार निवासी पशुपालक चंदन तिवारी ने बताया कि उन्होंने चार दिन पहले भूसा खरीदा था, जो उन्हें 1200 रुपये प्रति कुंतल के हिसाब से मिला। बढ़ते दामों से पशुपालन का खर्च लगातार बढ़ता जा रहा है और आने वाले महीनों में पशुओं के चारे का संकट और गहरा सकता है।



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