अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। शुक्रवार की रात वाराणसी से अहमदाबाद जा रही गाड़ी संख्या 19168 साबरमती एक्सप्रेस की 22 बोगियां कानपुर के पास गोविंदपुरी में पटरी से उतर गईं। इसके बाद यात्रियों को दूसरी स्पेशल ट्रेन से गंतव्य की ओर ले जाया गया। यह स्पेशल ट्रेन यात्रियों को लेकर शनिवार की दोपहर पौने तीन बजे झांसी पहुंची। यहां अमर उजाला से हुई बातचीत में यात्रियों ने हादसे का आंखों देखा हाल बयां किया।
ललितपुर के बार के रहने वाले जितेंद्र वर्मा कानपुर से साबरमती एक्सप्रेस में सवार हुए थे। उन्होंने बताया कि ट्रेन अपनी रफ्तार से आगे बढ़ रही थी। कोच में सन्नाटा छाया हुआ था और ज्यादातर यात्री गहरी नींद में थे। रात तकरीबन ढाई बजे अचानक तेज आवाज के साथ झटका लगा। सभी यात्री हड़बड़ा कर उठ गए। कोच के बाहर चिंगारी सी उठती दिखाई दी और जलने की गंध भी महसूस हुई। समझते देर न लगी कि ट्रेन हादसे का शिकार हो गई है। एक पल को ऐसा भी लगा कि जान खतरे में है लेकिन, कुछ ही पल में ट्रेन के पहिए अपनी जगह पर थम गए। कुछ देर बार कोच में चीख-पुकार मचना शुरू हो गई। इसके बाद यात्री सामान छोड़कर कोच के दरवाजे खोलकर बाहर की ओर भागे। दोनों ओर झाड़ियां थीं और अंधेरा छाया था। फिर भी किसी भी यात्री की ट्रेन में चढ़ने की हिम्मत नहीं हुई। तमाम लोगों ने मोबाइल की लाइट जला रखीं थीं। कई लोगों के मोबाइल भी ट्रेन में ही छूट गए थे। तकरीबन 20 मिनट के बाद पुलिस और फायर ब्रिगेड की गाड़ियों का आना शुरू हुआ, तब जाकर यात्रियों को राहत महसूस हुई। इसके बाद यात्रियों को लिए रेलवे ने बसों का इंतजाम कर दिया था, आस-पास के यात्री बसों से रवाना हो गए। सुबह सात बजे स्पेशल ट्रेन आई, जिसमें लंबी दूरी के यात्री सवार हो गए। उन्होंने बताया कि सभी यात्री ऐसा महसूस कर रहे हैं, जैसे उन्हें नई जिंदगी मिली हो।
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पूछिये मत क्या हुआ, बस भगवान राम ने बचा लिया। जब तेज आवाज के साथ ट्रेन पटरी से उतरी तो ऐसा लगा कि अब बच नहीं पाएंगे। गनीमत रही कि बोगियां पलटीं नहीं, जबकि हादसा बहुत बड़ा था। अंदाजा इससे लगा सकते हैं कि घटनास्थल पर पटरी उलटी हो गईं थीं। किसी तरह से स्पेशल ट्रेन से झांसी पहुंच गए। – संतोष सिंह, अयोध्या से आ रहे थे झांसी
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ज्यादातर यात्री सो रहे थे। अचानक तेज आवाज के साथ ट्रेन की रफ्तार थमने लगी। ऐसा लगा कि पहिये किसी चीज से रगड़ खा रहे हों। कुछ ही क्षणों में ट्रेन बेपटरी हो गई। कुछ मिनटों तक सभी यात्री सकते में रहे। इसके बाद सभी बाहर की ओर से भागे, जिससे दरवाजे पर धक्का-मुक्की की स्थिति पैदा हो गई थी। मिनटों में पूरी ट्रेन खाली हो गई। – धर्मेंद्र कुमार, अयोध्या से आ रहे थे झांसी
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मैं अपनी बहन और दो बच्चों के साथ साबरमती एक्सप्रेस में सवार थी। ट्रेन के पटरी से उतरने के बाद बहुत परेशानी हुई। चार-पांच घंटे वीरान जगह पर काटे। बच्चे रो रहे थे, लेकिन मैं उनके लिए कुछ नहीं कर पा रही थी। सुबह वहां बच्चों के लिए थोड़े से दूध का इंतजाम हो पाया। साबरमती ट्रेन से सामान उतारकर स्पेशल ट्रेन में चढ़ाने में भी बहुत परेशानी उठानी पड़ी। – काजल प्रजापति, लखनऊ से जा रहीं थीं अहमदाबाद
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जनरल कोच भीड़ से खचाखच भरा था। इसी दौरान तकरीबन ढाई बजे तेज आवाज के साथ झटका लगा। सभी यात्री एक-दूसरे से टकरा गए। ट्रेन के रुकते ही सभी बाहर की ओर भागे। मुश्किल से बाहर निकल पाए। – कुलदीप, कानपुर से जा रहे थे अहमदाबाद
