फिरोजाबाद और आगरा की औद्योगिक इकाइयों को गैस की ओवरड्रॉल बिलिंग से छुटकारा मिल गया। गेल गैस प्रबंधन ने गैस आवंटन की पुरानी व्यवस्था में बदलाव करते हुए अब इकाइयों को पिछले छह महीने के औसत उपभोग की बजाय उनकी कुल अनुबंधित मात्रा (डीसीक्यू) का अधिकतम 80 प्रतिशत तक गैस दिए जाने के की मंजूरी दी है।

सोमवार को हुई गेल की बोर्ड बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी मिल गई है। एक जुलाई से यह नई व्यवस्था लागू हो जाएगी। नेशनल चैंबर के अध्यक्ष मनोज कुमार बंसल के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने 22 जून को नोएडा में गेल गैस लिमिटेड के सीईओ आशु सिंघल, सीजीएम (मार्केटिंग) जफर खान और चीफ फाइनेंस ऑफिसर (सीएफओ) अमित झलानी से मुलाकात की थी।

मुलाकात के दौरान चैंबर अध्यक्ष ने अधिकारियों को बताया था कि गेल गैस द्वारा सितंबर 2025 से मार्च 2026 तक के 6 माह के औसत उपभोग के आधार पर गैस कटौती कर बिलिंग की जा रही है। इससे गैस उपभोक्ता इकाइयों को ओवरड्रॉल के भारी-भरकम बिलों और भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

इस पर सीईओ आशु सिंघल ने आश्वासन दिया था कि अनुबंधित मात्रा पर 20 से 25 प्रतिशत का कट लगाने (यानी 75-80% डीसीक्यू) का प्रस्ताव 29 जून की बोर्ड बैठक में रखा जाएगा। इसी क्रम में सोमवार को बोर्ड ने 80% डीसीक्यू के प्रस्ताव को पास कर दिया। सीजीएम जफर खान ने भी स्पष्ट किया है कि इससे ओवरड्रॉल के प्रोविजनल बिल की समस्या समाप्त हो जाएगी।

 



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