उत्तर प्रदेश गोसेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने गोशालाओं के संचालन में सुधार के लिए बृहस्पतिवार को समीक्षा बैठक की। उन्होंने गोशालाओं को पक्की सड़क और कृषि श्रेणी के बिजली कनेक्शन से जोड़ने का आदेश दिया। साथ ही हरे चारे के उत्पादन के लिए किसानों के साथ अनुबंध करने की योजना समझाई।
अध्यक्ष ने गोशाला संचालन में ग्राम प्रधानों और सचिवों की कार्यशैली पर असंतोष व्यक्त किया। उन्होंने कलेक्ट्रेट परिसर में गो-आश्रय स्थलों के लिए गठित जिला स्तरीय अनुश्रवण और मूल्यांकन समिति की बैठक ली। उन्होंने बताया कि जिले के 17 गो-आश्रय स्थलों तक पहुंचने के लिए लगभग 20 किलोमीटर कच्चे मार्ग हैं। इन्हें लोक निर्माण विभाग और ग्रामीण अभियंत्रण विभाग जल्द ही पक्का करेंगे।
पायलट प्रोजेक्ट में कुछ गोशालाओं को स्वयं सहायता समूहों और किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) को सौंपने का सुझाव भी दिया गया। इन चिह्नित गोशालाओं में बायोगैस संयंत्र, पक्के शेड और विद्युत कनेक्शन जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। डीसी एनआरएलएम और उपनिदेशक कृषि के माध्यम से यह कार्य होगा।
मिशन ग्रीन प्रोडक्ट बनाएं
अध्यक्ष ने मिशन ग्रीन प्रोडक्ट की कार्ययोजना बनाने पर भी जोर दिया। कहा कि किसानों के साथ अनुबंध कर हरा चारा बैंक स्थापित करें। उन्होंने घायल, बीमार और छुट्टा गोवंश की सूचना देने के लिए एक टोल फ्री नंबर जारी करने का निर्देश दिया। पेस्टिसाइड और रासायनिक खादों के प्रयोग को कम करने के लिए प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की कार्ययोजना बनाने के लिए कहा। यह भी कहा कि कृषि सखियों के माध्यम से प्राकृतिक खेती को लखपति दीदी योजना से जोड़ा जाएगा। बैठक में जिलाधिकारी अरविंद एम बंगारी, एडीएम शुभांगी शुक्ला, पीडी रेनू कुमारी, उपनिदेशक कृषि मुकेश कुमार, डीसी मनरेगा रामायण सिंह यादव, डीसी एनआरएलएम राजन राय, सीवीओ डॉ. डीके पांडे सहित कई अधिकारी उपस्थित रहे।
