ग्राम पंचायतों में प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने के मामले में मंगलवार को राज्य सरकार ने हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में अपना जवाब दाखिल कर दिया है। सरकार अदालत की ओर से मांगा गया ब्योरा भी पेश कर दिया। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 11 अगस्त को निर्धारित की है। इस बीच याचिकाकर्ता सरकार के जवाब का प्रतिउत्तर दाखिल कर सकेंगे।
न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की खंडपीठ के समक्ष मामले में दाखिल याचिकाओं पर सुनवाई हुई। कोर्ट ने सरकार से पूछा था कि क्या प्रशासक नियुक्त करने का आदेश सरकार जारी कर सकती है? क्या राज्य सरकार पंचायत चुनाव करवाने में नाकाम रही?
अदालत ने राज्य सरकार को समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग बनाने का ब्योरा समेत आयोग की कार्रवाई रिपोर्ट भी पेश करने का निर्देश दिया था। राज्य सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता जयदीप नारायण माथुर और मुख्य स्थायी अधिवक्ता शैलेंद्र कुमार सिंह पेश हुए।
इलाहाबाद हाईकोर्ट स्थानांतरित करने की अर्जी
राज्य सरकार के मुख्य स्थायी अधिवक्ता ने बताया कि मामले को लखनऊ पीठ से इलाहाबाद हाईकोर्ट स्थानांतरित करने की अर्जी भी दाखिल की गई है। इस पर छह अगस्त को सुनवाई होगी। पिछली सुनवाई के दौरान पीठ ने कई अहम सांविधानिक सवाल उठाए थे और सरकार से प्रधानों को प्रशासक बनाने का स्पष्ट कानूनी आधार बताने को कहा था।
