बरेली में गन्ना उत्पादक (स्नातकोत्तर) महाविद्यालय बहेड़ी के असिस्टेंट प्रोफेसर (कॉमर्स) डॉ. मोहित भारद्वाज ने जिलाधिकारी को प्रार्थना-पत्र देकर आरोप लगाया है कि उन्हें बिना कारण बताए, बिना नोटिस, बिना विभागीय जांच और बिना सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति के सेवा से हटा दिया गया। आरोप है कि जंतर मंतर पर धरना में शामिल होने पर कार्रवाई की गई। प्रोफेसर ने प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराकर सेवा बहाल कराने की मांग की है।
डॉ. भारद्वाज का कहना है कि उनकी नियुक्ति महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय की स्वीकृति के बाद 20 जून 2024 को हुई थी और उन्होंने 11 जुलाई 2024 को कार्यभार ग्रहण किया। उनका दावा है कि कॉलेज ने उन्हें पहचान पत्र जारी किया, जिसकी वैधता 30 जून 2027 तक है। इसके अलावा 20 मई 2026 को कॉलेज प्रशासन ने उन्हें उत्कृष्ट आचरण और कार्यनिष्ठा का प्रमाणित करते हुए चरित्र प्रमाणपत्र भी जारी किया।
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प्रार्थना-पत्र में आरोप लगाया गया है कि इसके बावजूद अचानक बिना किसी आरोप, बिना कारण बताओ नोटिस (शो कॉज नोटिस), बिना विभागीय जांच और बिना सुनवाई का अवसर दिए उनकी सेवा समाप्त कर दी गई। उन्होंने इसे प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों और उत्तर प्रदेश उच्च शिक्षा विभाग की स्ववित्तपोषित महाविद्यालयों संबंधी नियमावली के विपरीत बताया है।