राज्य विद्युत नियामक आयोग ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए ट्रांसमिशन और उत्तर प्रदेश स्टेट लोड डिस्पैच सेंटर (यूपीएसएलडीसी) का टैरिफ जारी कर दिया है। आयोग ने अपने आदेश में महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए टैरिफ आधारित प्रतिस्पर्धी बोली से चयनित निजी ट्रांसमिशन परियोजनाओं को भी शुल्क के दायरे में शामिल कर लिया है।

आयोग के इस निर्णय से बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) पर अतिरिक्त लागत का बोझ कम होगा। माना जा रहा है कि इससे उपभोक्ताओं को भी राहत मिल सकती है। टैरिफ आदेश के अनुसार, राज्य के भीतर डिस्कॉम और भारतीय रेलवे के लिए ट्रांसमिशन शुल्क 234375.50 रुपये प्रति मेगावाट प्रति माह निर्धारित किया गया है। वहीं, अन्य ओपन एक्सेस उपभोक्ताओं के लिए यह शुल्क 0.3075 रुपये प्रति यूनिट तय किया गया है।

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आयोग ने वर्ष 2026-27 के लिए कुल ट्रांसमिशन सिस्टम लागत लगभग 8440.13 करोड़ रुपये स्वीकृत की है तथा कुल बेस ट्रांसमिशन क्षमता 30009.30 मेगावाट निर्धारित की है। साथ ही, सौर ऊर्जा नीति 2022 और डेटा सेंटर नीति 2021 के अंतर्गत मिलने वाली छूट को जारी रखने के निर्देश दिए गए हैं, जिन्हें मासिक बिलों में समायोजित किया जाएगा।

बिजली व्यवस्था को अधिक सुरक्षित और आधुनिक बनाने के लिए आयोग ने कई निर्देश भी जारी किए हैं। इनमें 220 केवी और उससे अधिक क्षमता वाले सबस्टेशनों का वार्षिक सुरक्षा ऑडिट, ट्रांसमिशन लॉस का अध्ययन, साइबर सुरक्षा को मजबूत करना, डिजिटल तकनीकों का उपयोग और कर्मचारियों के कौशल विकास पर जोर शामिल है।

अलग से नियुक्त होगा प्रबंध निदेशक

इसके अलावा, आयोग ने उत्तर प्रदेश स्टेट लोड डिस्पैच सेंटर के लिए स्वतंत्र प्रबंध निदेशक की नियुक्ति की प्रक्रिया तत्काल शुरू करने के निर्देश दिए हैं, ताकि इसकी कार्यप्रणाली अधिक पारदर्शी और प्रभावी बन सके। उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा है कि आयोग ने अपने आदेश में उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद द्वारा उठाए गए अधिकांश मुद्दों और सुझावों को समाहित किया है, जिससे उपभोक्ताओं के हितों को प्राथमिकता दी गई है।



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