भीषण गर्मी में एक्सप्रेस-वे पर तेज रफ्तार जानलेवा हो सकती है। आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे पर इंजीनियर की कार के साथ ऐसा ही हादसा हुआ, जिसमें उनकी बेटी की मौत हो गई। उनकी कार का टायर फट गया। कार अनियंत्रित होकर डिवाइडर से टकराते हुए पलट गई।
हवा का दबाव बढ़ने से फट जाता है टायर
आरबीएस इंजीनियरिंग टेक्निकल कैंपस, बिचपुरी के प्रशासनिक और फाइनेंस विभाग के निदेशक प्रोफेसर पंकज गुप्ता ने बताया कि एक्सप्रेसवे पर टायर फटने का सबसे मुख्य कारण तेज गति और सड़क के घर्षण से उत्पन्न होने वाली अत्यधिक गर्मी है। जब गाड़ियां लगातार तेज रफ्तार में कंक्रीट या कोलतार की सड़क पर चलती हैं तो टायरों के अंदर की हवा फैलती है। हवा का दबाव बढ़ने से टायर अचानक फट जाता है।
टायर फटने के ये हैं मुख्य कारण
कम हवा : टायरों में हवा कम होने से उनका सड़क के साथ घर्षण बढ़ जाता है। इससे टायर तेजी से गर्म होने लगता है। उनकी साइड की दीवार कमजोर होने लगती है और टायर फट जाता है।
ज्यादा हवा : जरूरत से ज्यादा हवा भरने पर हाई-स्पीड ड्राइविंग के दौरान अंदरूनी दबाव खतरनाक स्तर तक पहुंच जाता है। दबाव अधिक होने पर टायर फट जाता है।
पुराने टायर : टायर जितने पुराने हो जाते हैं, उनकी रबर समय के साथ और कमजोर हो जाती है। यदि टायरों की ग्रिप पूरी तरह घिस चुकी है या कोई कट या दरार है तो वे एक्सप्रेसवे का दबाव और तापमान झेल नहीं पाते।
ओवरलोडिंग : गाड़ी में क्षमता से अधिक सामान रखना। यात्री बैठाने से टायरों पर भारी दबाव पड़ता है। अधिक वजन के कारण टायर चलते समय सामान्य से ज्यादा मुड़ते हैं, जिससे अत्यधिक गर्मी पैदा होती है। इससे फटने की संभावना बढ़ जाती है।
टायर की क्षमता को न करें नजरअंदाज
प्रो. गुप्ता ने बताया कि गर्मी के माैसम में घर्षण अधिक होता है। सड़क का तापमान बहुत ज्यादा होने पर वह टायरों को तेजी से कमजोर करता है। हर टायर पर एक विशिष्ट स्पीड रेटिंग कोड (जैसे जे.के.वी.) लिखा होता है, जो उसकी अधिकतम सुरक्षित गति तय करता है। तय सीमा से अधिक रफ्तार पर गाड़ी चलाने से टायर की संरचनात्मक मजबूती खत्म हो जाती है। इससे हादसा होने की संभावना रहती है।
लंबे सफर पर नाइट्रोजन का करें प्रयोग
विशेषज्ञ ने बताया कि हमेशा यात्रा शुरू करने से पहले (टायर के ठंडा होने पर) गाड़ी के मैनुअल के अनुसार, सही पीएसआई में हवा भरवाएं। एक्सप्रेसवे पर लंबे सफर के लिए सामान्य हवा के बजाय टायरों में नाइट्रोजन गैस भरवाना बेहतर होता है। यह टायरों को ठंडा रखने में मदद करती है। हर 1 दो 2 घंटे के सफर के बाद गाड़ी को कुछ देर के लिए रोक दें, जिससे टायर और इंजन दोनों ठंडे हो सकें।
