बदायूं, बरेली, पीलीभीत समेत कई जिलों के निवेशकों से 500 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम हड़पने के आरोपी अमर ज्योति कंपनी के निदेशक शशिकांत मौर्य और उसके भाई सूर्यकांत मौर्य की गिरफ्तारी पर दिए गए स्थगन आदेश को हाईकोर्ट ने 10 अप्रैल को निरस्त कर दिया है। इससे आरोपियों की गिरफ्तारी का रास्ता साफ हो गया है।
निवेशकों की ओर से बरेली के कटरा चांद खां में स्थित आरोपियों के घर का घेराव और एसएसपी कार्यालय के बाहर प्रदर्शन के बाद बरेली और बदायूं में दोनों के खिलाफ 10 से ज्यादा रिपोर्ट दर्ज की गई थी। दोनों पर 50-50 हजार रुपये का इनाम भी घोषित कर गिरफ्तारी के लिए एसआईटी बना दी गई थी। सूर्यकांत भाजपा का महानगर अध्यक्ष था। रिपोर्ट दर्ज होने के बाद भाजपा ने उसे निष्कासित कर दिया था।
आरोपियों ने गिरफ्तारी से बचने के लिए हाईकोर्ट की शरण ली थी। कोर्ट ने निवेशकों की रकम वापस करने की शर्त पर गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी। इसके बाद भी आरोपियों ने निवेशकों के रुपये नहीं लौटाए। बदायूं कोतवाली में दर्ज एक मामले में गिरफ्तारी को लेकर पीड़ितों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट ने स्थगन आदेश को निरस्त करते हुए आरोपियों की गिरफ्तारी का आदेश दिया है।
बदायूं-बरेली में दर्ज हैं कई केस
मामले की गंभीरता को देखते हुए बदायूं में चार समेत बरेली में भी कई केस दर्ज किए जा चुके हैं। निवेशकों ने आरोप लगाया कि कंपनी के जरिये करोड़ों रुपये की ठगी की गई है। इस प्रकरण को लेकर दोनों जिलों में विरोध-प्रदर्शन भी हुए और मामला सुर्खियों में बना रहा।
