प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं से जून माह में 10 फीसदी ईंधन अधिभार शुल्क वसूला जा रहा है। इस मामले में नियामक आयोग ने सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने पॉवर कॉर्पोरेशन के प्रबंध निदेशक को दोबारा नोटिस जारी किया है। 

उन्हें 19 जून तक इस वसूली का आधार बताने वाली रिपोर्ट देने का निर्देश दिया गया है।

विद्युत उपभोक्ताओं के बिजली बिल में 10 प्रतिशत ईंधन और बिजली खरीद लागत समायोजन (एफपीपीसीए) की वसूली हो रही है। राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने इसके विरोध में नियामक आयोग में याचिका दायर की। आयोग ने 10 प्रतिशत ईंधन अधिभार को नियम विरुद्ध बताया। 

उसने पॉवर कॉर्पोरेशन को नोटिस भेजकर दस्तावेज मांगे थे। सप्ताह भर बाद भी कॉर्पोरेशन जवाब नहीं दे पाया। प्रबंध निदेशक ने जवाब के लिए दो सप्ताह का अतिरिक्त समय मांगा। वर्मा ने इस पर आपत्ति जताई और वसूली रोकने की मांग की। इसके बाद नियामक आयोग ने बुधवार को प्रबंध निदेशक को फिर नोटिस भेजा।

 



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