सोने पर आयात शुल्क बढ़ने के बावजूद यूपी में इसकी मांग कम होती नहीं दिख रही है। यूपी जैसे बड़े उपभोक्ता राज्य में शादी-ब्याह, ग्रामीण बचत और निवेश के कारण सोने की खरीद लगातार होती है। सराफा कारोबारियों के अनुसार प्रदेश में हर साल करीब 100 टन सोने की मांग बनी रहती है। शादी-ब्याह, बचत और निवेश के कारण लोग लगातार सोना खरीद रहे हैं।

ऑल इंडिया ज्वैलर्स एंड गोल्डस्मिथ फेडरेशन के राष्ट्रीय महासचिव नितिन केडिया ने बताया कि यूपी देश की कुल सोना खपत में लगभग 15% हिस्सेदारी रखता है। लखनऊ, कानपुर, वाराणसी, मेरठ, आगरा, मथुरा, नोएडा और गोरखपुर बड़े सराफा बाजार हैं। उन्होंने बताया कि 2011 में भारत ने करीब 969 टन सोना आयात किया था। उस समय आयात शुल्क लगभग 2% था। बाद में सरकार ने विदेशी मुद्रा बचाने और चालू खाता घाटा कम करने के लिए 2012-13 में शुल्क बढ़ाकर 10% तक कर दिया। इससे कुछ समय के लिए आयात घटा, लेकिन बाद में मांग फिर बढ़ने लगी।

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कीमती धातुओं के कारोबारी राकेश गर्ग के मुताबिक 2019 में आयात शुल्क 12.5% और 2022 में करीब 15% पहुंच गया। इसके बावजूद सोने में निवेश और खरीदारी जारी रही। 2024 में शुल्क घटाकर छह फीसदी करने से आयात तेजी से बढ़ा। 2025 में भारत का गोल्ड आयात 58.9 अरब डॉलर तक पहुंच गया। अब फिर शुल्क करीब 15% कर दिया गया है। यूपी सराफा एसोसिएशन के सचिव आरके मिश्रा ने बताया कि लोग अब भारी गहनों की जगह हल्के डिजाइन, 18 कैरेट ज्वैलरी और पुराने गहनों के एक्सचेंज मॉडल को ज्यादा पसंद कर रहे हैं।

लखनऊ-कानपुर में निवेश तेजी से बढ़ा

वरिष्ठ निवेश सलाहकार श्रेष्ठ गोधवानी के अनुसार प्रदेश में डिजिटल गोल्ड और गोल्ड ईटीएफ में निवेश तेजी से बढ़ रहा है। देश में गोल्ड ईटीएफ निवेशकों की संख्या 1.24 करोड़ से ज्यादा हो चुकी है, जिनमें 20 लाख से अधिक निवेशक यूपी से हैं। वर्ष 2025 में गोल्ड ईटीएफ में करीब 43000 करोड़ रुपये का निवेश हुआ, जिसमें यूपी की हिस्सेदारी 6200 करोड़ रुपये रही। नोएडा, गाजियाबाद, लखनऊ और कानपुर में इस तरह के निवेश तेजी से बढ़ रहे हैं।

सिर्फ टैक्स बढ़ाने से कम नहीं होती मांग: वरिष्ठ कर सलाहकार एसके वैश्य का कहना है कि भारत और खासकर यूपी में सोना सिर्फ गहना नहीं बल्कि बचत और सुरक्षित निवेश का सबसे भरोसेमंद माध्यम माना जाता है। यही कारण है कि आयात शुल्क बढ़ने के बाद भी इसकी मांग पूरी तरह कम नहीं होती।



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