लखनऊ शहर की सड़कों और गलियों में घूमने वाले निराश्रित कुत्तों की जनसंख्या में कमी करने के निकायों को राज्य वित्त आयोग से जरूरी कामों के लिए दिए जाने वाले पैसे में कटौती की जाएगी। राज्य वित्त आयोग से दिए जाने वाले पैसों में 3363 करोड़ रुपये की कटौती की जाएगी। इन पैसों को निराश्रित कुत्तों की जनसंख्या को रोकने पर खर्च किया जाएगा।
राज्य सरकार निकायों को पंचम राज्य वित्त आयोग से विभिन्न कामों के लिए पैसे देती है। इसमें वेतन देने के साथ ही अन्य काम कराए जाते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने शहरों में निराश्रित घूमने वालों कुत्तों को लेकर नाराजगी जताई है। इनकी जनसंख्या कम करने के लिए राज्यों को उपाय करने के निर्देश दिए गए हैं। यूपी के शहरी क्षेत्रों में निराश्रित कुत्तों की संख्या अपार है। उच्चाधिकारियों की बैठक में इसको लेकर चिंता व्यक्त की गई है। इसी के आधार पर नियंत्रण कार्यक्रम तैयार किया गया है।
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नगर विकास के उप सचिव राजेश्वरी प्रसाद ने इस संबंध में निकायों को निर्देश भेज दिए हैं। इसके मुताबिक कुल सात मदों में 3363.30 करोड़ रुपये की कटौती की जाएगी। नगर निकायों के बिजली देयों के भुगतान का 2250 करोड़, एसटीपी रख-रखाव का 488 करोड़, डब्ल्यूटीपी संचालन व रख-रखाव का 10 करोड़, पेंशन फंड का 168 करोड़, निराश्रित श्वानों के बंध्याकरण के लिए एनिमल कंट्रोल योजना से 22 करोड़, पं. दीन दयाल उपाध्याय नगर विकास योजना में दिए गए ऋणों का 374 और मेसर्स त्रिवेणी आगरा का 50 करोड़ रुपये काटा जाएगा।
निकायों को वित्तीय वर्ष 2026-27 में दी जाने वाली राज्य वित्त आयोग की धनराशि में से कटौती करने तथा किसी एक मद की धनराशि खत्म होने पर तात्कालिक जरूरत के दृष्टिगत अन्य मदों से आगामी माह में जरूरतों की प्रतिपूर्ति की जाएगी।
