इलाहाबाद हाईकोर्ट की एकल पीठ ने ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाने के मामले की याचिका की सुनवाई को छह सप्ताह के लिए टाल दिया है। मामले की सुनवाई कर रही न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी की एकल पीठ ने कहा कि इस समान मामले की सुनवाई हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में दो जजों की पीठ कर रही है। ऐसी दशा में इस स्तर पर हाइकोर्ट की एकल पीठ में सुनवाई संभव नहीं है।

बता दें कि पिछली सुनवाई पर न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की पीठ ने अरविंद राठौर की याचिका पर सुनवाई करते हुए 25 मई 2026 और 26 मई 2026 के उन सरकारी आदेशों को ‘गैर-मौजूद’ (असंवैधानिक) करार दिया, जिनसे चुनाव टाले गए थे। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ये आदेश अधिनियम, 1947 की धारा 12 (3-ए) के तहत पारित किए गए थे, जिसे ‘प्रमोद लाल पटेल बनाम उत्तर प्रदेश राज्य’ मामले में उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने पहले ही असंवैधानिक घोषित कर दिया था।

न्यायालय ने जोर दिया था कि संविधान के अनुच्छेद 243 ई और 243 (के) के तहत पंचायतों का कार्यकाल पांच साल का निश्चित होता है और चुनाव समय पर होने चाहिए। राज्य सरकार ने ओबीसी आयोग की रिपोर्ट लंबित होने को देरी का कारण बताया, जिस पर कोर्ट ने हैरानी जताई कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के बावजूद ओबीसी आयोग ने अब तक अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की है। राज्य चुनाव आयोग ने बताया कि मतदाता सूची 10 जून 2026 को प्रकाशित हो चुकी है और वे चुनाव कराने के लिए तैयार हैं, लेकिन राज्य सरकार से आवश्यक लॉजिस्टिक्स न मिलने के कारण चुनाव में बाधा आ रही है।



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