एक समय था जब घरों में शाम ढलते ही किस्से सुनाई देते थे, दादी के चुटकुलों पर ठहाके गूंजते थे और हंसी पूरे आंगन में फैल जाती थी। आज सब साथ बैठते जरूर हैं, लेकिन हर कोई अपनी-अपनी स्क्रीन में कैद है। कोई फोन तो कोई टीवी, बच्चों की इयरफोन के पीछे दुनिया छिपी है। विश्व हास्य दिवस पर अलीगढ़ के परिवारों में हंसी तलाशती दीपक शर्मा की यह रिपोर्ट

यहां हर कोना हंसता है

यह संयुक्त अग्रवाल परिवार हंसी से भरा संसार है, जहां रिश्ते ठहाकों से मजबूत होते हैं। राकेश-साधना, अनिल-निर्मला, नामित-बबीता, पंकज-रिंकू, संदीप-स्मिता और सौरभ-नेहा अग्रवाल के साथ बच्चों की पलटन (संचित, सिद्धांत, सुकृति, देवांश, चिराग, चित्रांक, प्रमित और सजल) की मौजूदगी में यहां मोबाइल की जरूरत नहीं पड़ती। इस घर में खुशियां वाई-फाई पर नहीं, साथ बैठने और दिल खोलकर हंसने में बसती हैं।

प्रीमियर नगर बैंक कॉलोनी मीनाक्षी अग्रवाल परिवार, सब मोबाइल में खोए हुए

यहां हंसी की तलाश

प्रीमियर नगर बैंक कॉलोनी का निवासी मीनाक्षी अग्रवाल यह परिवार आधुनिक दौर की सच्चाई दिखा रहा है। घर एक है, पर सदस्यों की दुनिया अलग-अलग है। बच्चे (तनु, डॉली, तन्मय, नव्या, पार्थ, हृद्यांश, धारा और जिज्ञासा) स्कूल से आते ही सीधे मोबाइल और ऑनलाइन गेम्स में खो जाते हैं। घर के बड़ों का ध्यान टीवी ने खींच लिया। यहां बातचीत और हंसी-ठिठोली की जगह अब स्क्रीन ने ले ली है।

फ्री की दवा है हंसी, असर बहुत

हंसने से तनाव बढ़ाने वाला हार्मोन कोर्टिसोल घटता है और सेरोटोनिन बढ़ता है, जिससे मानसिक शांति मिलती है। हंसी रक्त धमनियों को आराम देती है और ब्लड प्रेशर नियंत्रित रखने में मदद करती है।– डॉ. विकास मल्होत्रा

हंसते समय चेहरे की कई मांसपेशियां सक्रिय होती हैं। यह चेहरे के लिए एक बेहतरीन एक्सरसाइज है। हंसते समय गहरी सांस लेना और तेजी से छोड़ना, इससे फेफड़ों में ऑक्सीजन बढ़ती है और पाचन तंत्र भी बेहतर होता है। – डॉ. गीता प्रधान, पूर्व अपर स्वास्थ्य निदेशक, अलीगढ़

हंसने से दिल की धड़कन सामान्य रहती है। रोजाना 10 मिनट खुलकर हंसना हमारे लिए संजीवनी है। इससे उम्र में औसतन छह साल की वृद्धि होती है। हंसी से मानसिक तनाव कम होता है और सकारात्मक सोच बढ़ाने में मदद करती है। – डॉ. यशपाल रावल, फिजिशियन



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