नई व्यवस्था के चलते मरीजों की बढ़ी परेशानी

टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत व्यवस्था लागू

संवाद न्यूज एजेंसी

उरई। जिला अस्पताल और राजकीय मेडिकल कॉलेज में अब चेस्ट (सीने) का एक्सरे कराने वाले मरीजों को पहले टीबी विभाग का पर्चा भी बनवाना होगा। स्वास्थ्य विभाग ने यह व्यवस्था 24 मार्च से संचालित सौ दिवसीय सघन टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत लागू की है। अभियान का उद्देश्य अधिक से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग कर संभावित टीबी रोगियों की पहचान करना है। हालांकि नई व्यवस्था के चलते मरीजों को अतिरिक्त औपचारिकताओं से गुजरना पड़ रहा है, जिससे उनकी परेशानी बढ़ गई है।

सीएमओ डॉ. हरिनंदन प्रसाद ने जिला अस्पताल और राजकीय मेडिकल कॉलेज के मुख्य चिकित्सा अधीक्षकों को पत्र भेजकर निर्देश दिए हैं कि चेस्ट एक्सरे कराने वाले प्रत्येक मरीज का विवरण टीबी विभाग के माध्यम से दर्ज किया जाए। इसके तहत मरीज का नाम, आयु, पता, मोबाइल नंबर और प्रतिदिन किए गए चेस्ट एक्सरे की संख्या का रिकॉर्ड तैयार कर राज्य मुख्यालय को भेजा जाएगा। स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि इससे टीबी रोगियों की पहचान में मदद मिलेगी, जबकि मरीजों का कहना है कि व्यवस्था को और सरल बनाया जाना चाहिए, ताकि जांच कराने वालों को अनावश्यक परेशानी न उठानी पड़े।

एक्सरे कक्ष से लौटाए जा रहे मरीज

नई व्यवस्था लागू होने के बाद जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज में कई मरीजों को एक्सरे कक्ष से वापस भेजा जा रहा है। यदि किसी चिकित्सक द्वारा मरीज को चेस्ट एक्सरे की सलाह दी जाती है, तो एक्सरे विभाग के कर्मचारी पहले टीबी विभाग का पर्चा बनवाने के लिए कहते हैं। इसके बाद ही एक्सरे की प्रक्रिया पूरी की जा रही है। इस अतिरिक्त प्रक्रिया के कारण मरीजों को एक विभाग से दूसरे विभाग के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। कई मरीजों का कहना है कि पहले जहां सीधे एक्सरे हो जाता था, वहीं अब पर्चा बनवाने में अतिरिक्त समय लग रहा है।

अभियान के तहत बढ़ाई जा रही स्क्रीनिंग

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, सौ दिवसीय सघन टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत अधिक से अधिक लोगों की जांच कर छिपे हुए मरीजों की पहचान करने का लक्ष्य रखा गया है। इसी क्रम में चेस्ट एक्सरे कराने वाले मरीजों का डेटा संकलित किया जा रहा है, ताकि जरूरत पड़ने पर उनकी आगे की जांच और फॉलोअप किया जा सके।

वर्जन

निर्देशों का पालन कराया जा रहा है। शासन स्तर से जारी आदेश के अनुसार चेस्ट एक्सरे कराने वाले मरीजों का विवरण टीबी विभाग के माध्यम से दर्ज किया जा रहा है।-डॉ. जेजे राम, सीएमएस, जिला अस्पताल



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