त्योहारी सीजन और मानसून के बाद निर्माण कार्यों में आई तेजी के बीच लोहे के बढ़ते दाम लोगों को लोहे के चने चबवा रहे हैं। रियल एस्टेट कारोबार को तगड़ा झटका लगा है। महज एक महीने के भीतर सरिया, पाइप और गर्डर की कीमतों में 8 से 15 रुपये प्रति किलो तक का भारी उछाल आया है।
जिले में हर महीने करीब 20 से 25 हजार टन लोहे का व्यापार होता है, जिसमें अकेले 17 से 18 हजार टन सरिया की खपत है। इस अप्रत्याशित मूल्यवृद्धि ने रियल एस्टेट सेक्टर की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है। लोहामंडी के व्यापारियों के अनुसार, वर्ष 2026 में आई इस तेजी के पीछे कई कारण हैं। सबसे बड़ा कारण आयातित कोकिंग कोल का महंगा होना है, जिसकी स्टील निर्माण लागत में 30-40 फीसदी की हिस्सेदारी होती है। इसके अलावा मानसून के बाद इंफ्रा, ऑटो और बिल्डिंग सेक्टर में मांग बढ़ी है।
वहीं, मिलों में मेंटेनेंस शटडाउन और डिस्ट्रीब्यूटर इन्वेंट्री कम होने से सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित है। आयातित स्टील पर सेफगार्ड ड्यूटी लगने से भी घरेलू मिलों को दाम तय करने का एकाधिकार सा मिल गया है। आगरा में लोहे की सरिया, पाइप और गर्डर की मुख्य सप्लाई झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़, कर्नाटक और गुजरात, महाराष्ट्र और तमिलनाडु की रोलिंग मिलों और स्टील प्लांट से होती है। फिलहाल इन सभी केंद्रों से आवक कमजोर है।
रेट सुनकर काम टाल रहे ग्राहक
आगरा लोहा व्यापारी एसोसिएशन के अध्यक्ष मुकेश अग्रवाल ने बताया कि पीछे रोलिंग मिलों से ही माल महंगे रेट पर आ रहा है। कोयला महंगा होने और सप्लाई में तंगी के कारण कंपनियों ने रेट बढ़ा दिए हैं। दाम इतने बढ़ गए हैं कि कई ग्राहक तो रेट सुनकर ही काम टाल रहे हैं।
हर दस दिन में बदल रहे रेट
आगरा लोहा व्यापारी एसोसिएशन के महामंत्री दिनेश अग्रवाल ने कहा कि लोहे की कीमतों में आग लगी है। हर दस दिन में रेट बदल रहे हैं। इस महीने तीन बार सरिया के रेट बढ़े हैं। घर बनाने में कई टन लोहा लगता है। निर्माण कंपनियों की मोनोपोली खत्म होनी चाहिए।
गड़बड़ा रहा बड़े प्रोजेक्ट्स का बजट
क्रेडाई के पूर्व अध्यक्ष भगत सिंह बघेल ने बताया कि अचानक सरिया और गर्डर के दाम 15 रुपये तक बढ़ जाने से हमारे प्रोजेक्ट्स का पूरा बजट गड़बड़ा गया है। जो निर्माण कार्य दिवाली तक पूरे होने थे, उन्हें फंड की कमी और बढ़ी हुई लागत के कारण रोकना पड़ रहा है।
लिंटर, बीम, कॉलम का खर्च बढ़ा
लोहे की कीमतों में बेतहाशा उछाल ने घर के लिए लिंटर, कॉलम और बीम खड़ा करना महंगा कर दिया है। जो लोग पाई-पाई जोड़कर अपना घर बनाने की तैयारी कर रहे थे, उनका बजट पूरी तरह से लोहा खरीदने में गड़बड़ा गया है। एक मध्यमवर्गीय परिवार के लिए मकान निर्माण की लागत में अचानक लाखों रुपये का इजाफा हो गया है। लोगों को मजबूरी में अपने आशियाने का सपना फिलहाल टालना या अधूरा छोड़ना पड़ रहा है।
63 से 78 रुपये किलो पहुंची कीमत
लोहा बाजार में 15 अगस्त को ब्रांडेड सरिया 63 रुपये किलो थी, जो बुधवार को 78 रुपये किलो बिकी। लोहा व्यापार एसोसिएशन के अनुसार लोकल ब्रांड की सरिया पर आठ रुपये किलो कीमत बढ़ी है। एंगल 49 रुपये था, जो अब 57 रुपये किलो है। पाइप 10 रुपये किलो बढ़कर 55 से 65 रुपये, गर्डर 54 रुपये से बढ़कर 61 रुपये किलो हो गया है।
