शहर की धड़कन कहे जाने वाले एमजी रोड पर प्रतिदिन जाम लग रहा है। राष्ट्रीय राजमार्ग पर मेट्रो के काम से ऐसा हो रहा है। पीक आवर्स में पुलिस की यातायात व्यवस्था फेल हो जाती है। हाईटेक तरीके से मॉनिटरिंग में भी समाधान नहीं निकल रहा। जिम्मेदार अफसर एसी दफ्तरों से बाहर नहीं निकलते और कागजों पर प्लान तैयार हो जाते हैं। इस समस्या के लिए पुलिस के साथ नगर निगम और पीडब्ल्यूडी भी जिम्मेदार हैं।

अमर उजाला कार्यालय में बुधवार को आयोजित संवाद कार्यक्रम में चिकित्सक, समाजसेवी और व्यापारियों ने यातायात व्यवस्था पर अपने विचार रखे। सुधार के लिए सुझाव भी दिए। अमर उजाला ने ऑपरेशन ट्रैफिक अभियान शुरू किया है। इसके तहत शहर के प्रमुख मार्ग पर जाम की समस्या को उठाया गया। संवाद में व्यापारियों ने अतिक्रमण की समस्या रखी। चिकित्सकों ने यातायात संचालन न होने के लिए पुलिस को जिम्मेदार ठहराया। पार्किंग न होने, पीक आवर्स में पुलिस के सक्रिय तरीके से नहीं रहने, अतिक्रमण से सड़कों पर आवागमन प्रभावित होने की बात कही। कहा कि सड़कें कहीं भी और कभी भी खोद दी जाती है। इसके लिए पूर्व सूचना तक नहीं दी जाती। फुटपाथ पर अतिक्रमण होने से पैदल भी चलना मुश्किल हो जाता है। अतिक्रमण पर सख्ती से कार्रवाई नहीं होती। वसूली के चक्कर में कर्मचारी पड़े रहते हैं।

संवाद में दिए सुझाव

– ट्रैफिक मॉनिटरिंग की ऐसी व्यवस्था विकसित हो, जिसके दायरे में सिपाही से लेकर कमिश्नर तक को रखा जाए।

– फील्ड में कार्य करने वाले पुलिसकर्मियों को भी कैमरे के दायरे में रखा जाए। ऑनलाइन चालान कट सकता है तो मॉनिटरिंग क्यों नहीं।

– ट्रैफिक पुलिस के भी काम का आकलन होना चाहिए। सही तरीके से यातायात संचालन करने वालों को सम्मानित किया जाए। समस्या का समाधान नहीं करने वालों को हटाया जाना चाहिए।

– एसी दफ्तर में बैठने वाले डीसीपी और एसीपी ट्रैफिक गोपनीय तरीके से क्यों नहीं चेक करते हैं कि जनता जाम में फंस रही है।

– तकनीकी स्तर पर यातायात व्यवस्था को मजबूत किया जाना चाहिए। हर स्तर पर मॉनिटरिंग की जाए।

– घर और प्रतिष्ठान बनाते समय पार्किंग का ख्याल रखना चाहिए। वाहन चलाते समय यातायात नियमों का पालन करना चाहिए।

– रोड इंजीनियरिंग में बदलाव से सुधार हो सकता है। फुटपाथ को अतिक्रमण मुक्त किया जाना चाहिए। सिर्फ कार्रवाई से कुछ नहीं होगा।

– अतिक्रमण होने पर थानेदारों की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। लापरवाही पर निलंबन की कार्रवाई की जानी चाहिए।

– हादसों के लिए सिर्फ यातायात व्यवस्था ही जिम्मेदार नहीं है। नगर निगम और पीडब्ल्यूडी के अधिकारी भी जिम्मेदार हों।

– चालान की कार्रवाई की जाए तो सख्ती से शमन शुल्क की वसूली भी की जानी चाहिए। वाहनों को सीज करने से लेकर लाइसेंस निलंबन भी किया जाए।

– स्कूलों की छुट्टी के समय ही यातायात पुलिस सुस्त हो जाती है। पीक आवर्स में यातायात पुलिस की अलग ड्यूटी लगनी चाहिए।

– शहर के प्रमुख बाजार से लेकर सरकारी कार्यालयों में पार्किंग की व्यवस्था होनी चाहिए। सड़क पर वाहन खड़ा होने पर पुलिस को कार्रवाई करनी चाहिए।

– ऑटो-ई रिक्शा चालक नियमों का उल्लंघन करते हैं। इनके लाइसेंस और पंजीकरण को चेक किया जाए। उल्लंघन पर पुलिस को कार्रवाई करनी चाहिए।

– यातायात व्यवस्था को बाधित करने वालों की शिकायत ऑनलाइन पोर्टल और सोशल मीडिया के माध्यम से शासन तक पहुंचाई जानी चाहिए।

– गलत दिशा में वाहन चलाने वालों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। वाहनों को सीज करें। चालान की कार्रवाई की जाए।

– निर्माण कार्य विभागों से समन्वय के बाद होने चाहिए। एक कार्य पूरा करने के बाद दूसरी जगह पर कार्य करना चाहिए। एक साथ सभी जगह निर्माण कार्य नहीं किया जाए।

– लोगों को पब्लिक ट्रांसपोर्ट का प्रयोग करना चाहिए। शेयरिंग से भी ऑफिस और अन्य काम के लिए जाया जा सकता है।

– एमजी रोड के स्थान पर एलिवेटेड रोड की आवश्यकता है। हर नागरिक को सिविक सेंस होना चाहिए।

यह रहे मौजूद

आगरा सर्जंस एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष डॉ. सुनील शर्मा, आईएमए के पूर्व अध्यक्ष डॉ. पंकज नगायच, आगरा आर्थोपेडिक सोसाइटी के सचिव डॉ. संजय चतुर्वेदी, वर्ल्ड रिकॉर्ड धारक डॉ. पार्थ सारथी शर्मा, स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. अर्चना सिंघल, आईएमए के पूर्व उपाध्यक्ष डॉ. योगेश सिंघल, हेल्प आगरा से जुड़े जगवीर सिंह, संस्कार भारती के प्रांतीय महामंत्री नंद नंदन गर्ग, संकल्प सेवा संस्था अध्यक्ष ब्रजेश पंडित, समाजसेवी नीनू गर्ग, सत्यमेव जयते के रविंद्र कुमार, हेल्प आगरा से जुड़े नंद किशोर गोयल और व्यापारी मनीष गर्ग।



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