
अयोध्या में रामलीला का एक दृश्य। (सांकेतिक)
– फोटो : amar ujala
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अयोध्या में रामलीला का एक दृश्य। (सांकेतिक)
– फोटो : amar ujala
रामनगरी अयोध्या की रामलीला अब केवल परंपरा और स्थानीय कलाकारों तक सीमित नहीं है। पिछले करीब एक दशक में इसका रंग-रूप तेजी से बदला है। 2017 में अयोध्या में बंद पड़ी रामलीलाओं को दीपोत्सव के मंच से दोबारा जीवंत करने की पहल हुई। इसके साथ ही रामलीला का केंद्र भी बदला। स्थानीय पारंपरिक मंचन की जगह हाईटेक मंच, सजीव प्रसारण, देश-विदेश की टीमें और फिल्मी सितारे आकर्षण का बड़ा केंद्र बन गए।
डिजिटल तकनीक और बड़े स्तर के प्रसारण ने रामकथा को अयोध्या की सीमाओं से निकालकर देश-दुनिया तक पहुंचाया। सरकार के संरक्षण में रामलीला और दीपोत्सव को बड़े पैमाने पर लगातार आयोजित किया गया। इससे न सिर्फ दर्शकों की संख्या में इजाफा हुआ बल्कि आयोजन की लोकप्रियता भी तेजी से बढ़ी। हालांकि, इस बदलाव के बीच सवाल यह भी उठा कि अयोध्या की अपनी पारंपरिक रामलीला और स्थानीय कलाकारों को अपेक्षित कितनी जगह मिली।