आगरा में जलवायु परिवर्तन और बढ़ते तापमान का असर केवल इन्सानों पर ही नहीं वन्यजीवों और पक्षियों की प्राकृतिक जीवन-शैली पर भी दिखने लगा है। इस साल भीषण गर्मी और अलनीनो के प्रभाव के कारण कई प्रवासी पक्षी अपने प्रजनन स्थलों की ओर समय पर वापस नहीं लौट पाए हैं। वे जून के अंत तक उत्तर भारत के वेटलैंड्स में डेरा डाले हुए हैं।
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बायोडायवर्सिटी रिसर्च एंड डेवलपमेंट सोसाइटी के पक्षी विशेषज्ञ डॉ. केपी सिंह ने बताया कि शीतकालीन प्रवास पर भारत आने वाले पक्षी मार्च और अप्रैल तक मध्य एशिया और यूरोप की ओर लौट जाते हैं। इस बार मौसम के असामान्य बदलाव और वायु धाराओं में परिवर्तन ने उनकी हजारों किलोमीटर लंबी यात्रा को प्रभावित कर दिया है।
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मई और जून में किए गए सर्वेक्षणों में केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान, जोधपुर झाल वेटलैंड और यमुना के तटीय क्षेत्रों में नॉर्दन शोवलर, ब्लैक-टेल्ड गोडविट,कॉमन रेडशॉक, रफ, स्पॉटेड रेडशैंक, रेड-क्रेस्टेड पोचार्ड, कॉमन टील, गारगेनी और लिटिल स्टिंट समेत कई प्रवासी प्रजातियां अब भी देखी गई हैं। इसे पर्यावरणीय असंतुलन का गंभीर संकेत माना गया है। प्रवासी पक्षियों की उड़ान अनुकूल हवाओं पर निर्भर करती है। अलनीनो के कारण कई पक्षी मार्ग में ही रुकने को मजबूर हो गए हैं।
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जैव विविधता के लिए चेतावनी
ब्रजतीर्थ विकास परिषद के सलाहकार मुकेश शर्मा ने बताया कि अलनीनो के दौरान प्रशांत महासागर की सतह का तापमान असामान्य रूप से बढ़ जाता है। विश्वभर में मौसम एवं पवन प्रणालियों में परिवर्तन के कारण प्रवासी पक्षियों की वापसी यात्रा कठिन होकर धीमी पड़ जाती है। यह स्थिति दर्शाती है कि जलवायु परिवर्तन अब केवल मौसम तक सीमित नहीं है बल्कि वन्यजीवों की पारिस्थितिकी एवं जैव विविधता को भी प्रभावित कर रहा है।
