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बीते 30 मई को फिरोजाबाद के शिकोहाबाद की यादव कॉलोनी में सड़क पर आठ बार पटककर डेढ़ साल के मासूम आरव की बेरहमी से हत्या करने वाले आरोपी को कोर्ट ने दोषी करार दिया है। आरोपी को आज सजा सुनाई जाएगी। सीसीटीवी में कैद हुई घटना का वीडियो देशभर में वायरल हुआ था। मामले में बृहस्पतिवार को जिला जज डॉ. बब्बू सारंग की अदालत ने आरोपी विराज उर्फ जितेंद्र पाठक (निवासी शेखूपुर, सिविल लाइंस, बदायूं) को दोषी करार देते हुए सजा पर फैसला सुरक्षित रख लिया। अदालत शुक्रवार को दोषी को सजा सुनाएगी।
पुलिस दोपहर करीब ढाई बजे विराज उर्फ जितेंद्र पाठक को जेल से अदालत लेकर पहुंची। अभियोजन और बचाव पक्ष के सामने अदालत ने आरोपी को बच्चे की हत्या का दोषी करार दिया। अदालत ने कहा, अभियोजन की ओर से पेश किए गए साक्ष्य पूर्ण हैं। घटना जघन्य है। दोषी करार दिए जाने के बाद जब पुलिस विराज को जेल ले जा रही थी तो उसके चेहरे पर सजा का खौफ नजर आ रहा था। मृतक आरव की नानी भी अदालत पहुंची थीं।
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आरव की हत्या के बाद सदमे में मां
– फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
यह है मामला
यादव कॉलोनी में 30 मई की दोपहर विराज उर्फ जितेंद्र पाठक ने रिश्ते की भाभी रति से शादी करने की जिद पूरी न होने पर उनके डेढ़ साल के मासूम बेटे आरव को सड़क पर बेरहमी से आठ बार पटका। इससे उसकी मौत हो गई। पुलिस ने मुठभेड़ के बाद आरोपी को देर रात गिरफ्तार कर लिया। उसके दोनों पैरों में गोली लगी थी।
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आरव की हत्या के बाद मुठभेड़ में घायल हुआ आरोपी विराज
– फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
मूलरूप से अरांव निवासी रति देवी की शादी फरवरी 2024 में बदायूं निवासी सुमित कुमार से हुई थी। पति से अनबन के कारण वह 5 महीने से मायके में रह रही थीं। इसी का फायदा उठाकर सुमित के फुफेरे भाई विराज ने रति को भरोसे में लेना शुरू कर दिया। बाद में उसने शादी का प्रस्ताव रखा, जिसे रति ने ठुकरा दिया।
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firozabad murder
– फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
30 मई को रति अपनी मां पिंकी देवी के साथ कानूनी राय लेने शिकोहाबाद आई थी। आरोपी विराज भी वहां पहुंच गया था। वह आरव को टॉफी दिलाने के बहाने बाहर ले गया और घर से 50 मीटर दूर सुनसान सड़क पर महज 27 सेकंड के भीतर वारदात को अंजाम दे डाला। इसके बाद बच्चे के शव को दरवाजे पर फेंककर भाग गया था।
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माता-पिता के साथ आरव
– फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
वारदात के महज छह दिन के भीतर पुलिस ने दाखिल कर दी थी चार्जशीट
आरव हत्याकांड में पीड़ित परिवार को जल्द न्याय दिलाने के लिए पुलिस ने शुरुआत से ही कमर कस ली थी। मामले की विवेचना इंस्पेक्टर अनुज कुमार ने की। वारदात के छह दिन के भीतर ही पुलिस ने अकाट्य साक्ष्यों के साथ अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी, जो 5 जून को अदालत में कमिट हो गई थी। जिला जज की अदालत में रिकॉर्ड समय में 15 जून से गवाहियां शुरू हुईं। अभियोजन पक्ष की ओर से अदालत के समक्ष कुल 13 महत्वपूर्ण गवाह पेश किए गए।