ईएसआईसी अस्पताल और मेडिकल कॉलेज में पिछले पांच महीनों से दवाओं की किल्लत चल रही है। यहां सामान्य तौर पर सिर दर्द-पेट दर्द और बुखार की दवाएं ही नहीं मिल रही हैं। मरीजों को दो-तीन घंटे लाइन में लगने के बाद भी निराश होकर लौटना पड़ रहा है। इसके कारण पूर्वांचल से प्रतिदिन ओपीडी में आने वाले 1200 मरीजों में से लगभग 1000 मरीजों को इस समस्या का सामना करना पड़ रहा है। इनमें 60 प्रतिशत मरीज श्रमिक परिवारों से आते हैं, जिनके खाते से हर महीने अंशदान जमा होता है।
अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले मरीज और उनके तीमारदार अस्पताल से लेकर डिस्पेंसरी और निजी मेडिकल स्टोर के चक्कर लगाने को मजबूर हैं। इसके अलावा सर्वर की समस्या के कारण कई बार मरीजों को दवा के लिए घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। सर्वर डाउन, दवा का स्टॉक न मिलने से मरीजों को परेशान होना पड़ रहा है।
केस- 1
सेवापुरी की दामिनी को स्किन में समस्या थी। चिकित्सक ने उन्हें तीन दवाएं लिखीं। दाेपहर 12 बजे से दो घंटे तक लाइन में लगने के बाद केवल एक दवा मिली। उन्होंने बाहर स्थित मेडिकल स्टोर से 550 रुपये की दवाएं खरीदीं। उन्होंने बताया कि एक महीने पहले भी इसी प्रकार से चार में से केवल एक ही दवा मिली थी।
केस- 2
भदोही के सात महीने के बच्चे को बुखार की समस्या थी। परिजन उसके इलाज के लिए अल सुबह ही अस्पताल में पहुंच गए। 10 बजे तक चिकित्सक ने दो दवाएं, जिसमें एक सिरप और एक ड्राप था, लिख दिया। दोपहर दो बजे तक दवा के लिए लाइन में लगने के बाद केवल एक ही सिरप मिल पाया।
केस- 3
चंदौली के विष्णु पाठक को कान में इंफेक्शन था। डॉक्टर ने उन्हें दो दवाएं लिखी थीं। काफी मशक्कत के बाद 3:30 घंटे में उन्हें एक ही दवा मिल पाई।
