एक जनपद एक उत्पाद (ओडीओपी) योजना में स्वरोजगार के लिए 30 कारोबारियों की वित्तीय सहायता का रास्ता साफ हो गया। 2.16 करोड़ के ऋण प्रस्ताव बैंकों से पास हो गए। जिला उद्योग केंद्र से 36 पत्रावलियां बैंकों को भेजी गई थीं।

ओडीओपी में चालू वित्तीय वर्ष की जून तिमाही के प्रदर्शन में सुधार हुआ है। जिला स्तर से बैंकों को भेजी गई कुल 36 पत्रावलियों में से 30 प्रस्तावों को स्वीकृति मिल गई है। इस दौरान केनरा बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा की प्रगति सबसे श्रेष्ठ रही है। बैंकवार आंकड़ों पर नजर डालें तो बैंक ऑफ बड़ौदा ने 11 प्रस्तावों को स्वीकृति देते हुए 9 मामलों में 70.3 लाख रुपये का वितरण किया। वहीं केनरा बैंक ने 8 प्रस्ताव स्वीकृत कर 5 आवेदकों को 12.03 लाख रुपये वितरित किए। इसके अलावा सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया ने भी 4 प्रस्तावों को मंजूरी देकर 40 लाख रुपये का ऋण जारी किया। हालांकि, कई बैंकों का प्रदर्शन निराशाजनक रहा। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, पंजाब नेशनल बैंक और बैंक ऑफ इंडिया में आवेदनों के लंबित और निरस्त होने की संख्या अधिक पाई गई। कुल 10 आवेदनों को विभिन्न कारणों से निरस्त किया गया है।

पेठा, रेस्तरां, जूता से मिलेगा स्वरोजगार

उत्तर प्रदेश सरकार की एक जनपद एक उत्पाद योजना का उद्देश्य राज्य के विशिष्ट पारंपरिक शिल्पों और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देना है। इसके तहत आगरा में जूता, पेठा, पराठा से लेकर रेस्तरां तक में स्वरोजगार के अवसर हैं। इन उत्पाद के निर्माण, ब्रांडिंग और विपणन के लिए उद्यमियों को वित्तीय सहायता व प्रोत्साहन दिया जाता है।

मिलता है रियायती ऋण और अनुदान

उद्योग विभाग के संयुक्त आयुक्त अनुज कुमार के अनुसार ओडीओपी योजना के तहत नए व मौजूदा सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को बैंकों के माध्यम से रियायती दरों पर ऋण और मार्जिन मनी अनुदान (सब्सिडी) प्रदान की जाती है। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा होते हैं और पारंपरिक हस्तशिल्प व उद्योगों को वैश्विक पहचान मिलती है।

 



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