इंडियन काउंसिल ऑफ एस्ट्रोलॉजिकल साइंस के सचिव आचार्य कौशल वत्स ने बताया कि बादलों की वजह से चंद्रमा का दर्शन न होने पर व्रत के दौरान भगवान शिव और लक्ष्मी नारायण का स्मरण करना चाहिए।
इस दौरान अपने पितृ जनों का स्मरण करें और उनका आशीर्वाद प्राप्त करें। साथ ही परंपरा अनुसार अपने सास और ससुर को ही प्रथम थाली परोसे। वह ही सबके लिए सर्वगुण संपन्न देवता हैं।
अगर वे न हों तो परिवार के बड़े को भोजन की थाली परोसें। यह व्रत संकल्प के साथ लिया जाता है। कोई भी न हो तो किसी भूखे को भोजन कराएं। यह पुण्य प्रताप का साधन होगा।
आचार्य मनीष स्वामी बताते हैं कि करवाचौथ के व्रत का पारण भगवान चंद्रदेव के दर्शन करने के बाद ही करना चाहिए। अगर विपरीत परिस्थितियों में चंद्रमा के दर्शन संभव न हों तो संकल्प लेकर भगवान विष्णु का स्मरण करें।




