भाजपा नेता रवि सतीजा की ओर से दर्ज कराए गए रंगदारी के मुकदमे में आरोपी अधिवक्ता अखिलेश दुबे और आयुष उर्फ लवी मिश्रा को हाईकोर्ट से फौरी राहत मिली है। हाईकोर्ट ने दोनों की याचिका पर फैसला आने तक आरोप तय करने पर रोक लगा दी है जिस कारण गुरुवार को अपर जिला जज प्रथम की अदालत में आरोप तय नहीं हो सके।
रवि सतीजा ने बर्रा थाने में रिपोर्ट दर्ज कराते हुए कहा था कि अखिलेश दुबे व उसके साथियों ने मिलकर उन्हें पॉक्सो के झूठे मुकदमे में फंसाया। मुकदमे में फाइनल रिपोर्ट लग गई तो आपत्ति दाखिल करने की बात कहते हुए रंगदारी मांगी गई। विवेचना के बाद पुलिस ने अखिलेश दुबे, उसके साथी लवी मिश्रा, शैलेंद्र यादव, अभिषेक वाजपेई उर्फ प्रियांशु और विमल यादव के खिलाफ चार्जशीट कोर्ट भेजी थी। मुकदमे की सुनवाई के दौरान अखिलेश, लवी और शैलेंद्र की ओर से आरोप मुक्ति प्रार्थना पत्र कोर्ट में दिए गए थे जिन्हें सेशन कोर्ट ने खारिज कर दिया था। इस आदेश के खिलाफ अखिलेश और लवी ने हाईकोर्ट में याचिकाएं दाखिल की हैं। लवी की याचिका पर सुनवाई पूरी हो चुकी है लेकिन आदेश नहीं आया है।
वहीं, अखिलेश की याचिका भी लंबित है। हाईकोर्ट ने आदेश आने तक सेशन कोर्ट को दोनों के खिलाफ आरोप तय करने पर रोक लगा रखी है। वहीं, विमल यादव की ओर से भी आरोप मुक्ति अर्जी सेशन कोर्ट में दाखिल की गई है। इस पर भी फैसला आना है। हाईकोर्ट के स्थगन आदेश के कारण गुरुवार को सेशन कोर्ट में भी मुकदमे की सुनवाई टल गई। अगली सुनवाई 10 सितंबर को होगी।
