नगर निगम में टेंडर घोटाले की जांच में अभी तक पांच फर्मों को काली सूची में डाला गया है। अब 11 और ठेकेदार फर्मों में खामियां मिली हैं। यह खुलासा सीडीओ की अध्यक्षता में गठित तीन सदस्यीय कमेटी की रिपोर्ट में हुआ है। जांच रिपोर्ट के आधार पर अब मंडलायुक्त ने नगर आयुक्त से गलत तरीके से पंजीकृत सभी 11 ठेकेदारों फर्मों को काली सूची में डालने व डिबार करने के निर्देश जारी किए हैं।
सीडीओ अभिनव जे. जैन की अध्यक्षता में गठित जांच समिति ने अपनी प्राथमिक जांच रिपोर्ट में अधूरे दस्तावेज, प्लांट सत्यापन में फर्जीवाड़ा, जिम्मेदार अधिकारियों पर भी सवाल उठाए हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि फर्म दिलीप कुमार बाजपेई के पंजीकरण में हॉट मिक्स प्लांट के दस्तावेजों को लेकर गंभीर विसंगति मिली। अभिलेखों में प्लांट की जमीन की लीज डीड और प्रदूषण विभाग की एनओसी में पता रिलायंस पंप के बगल में माधवबाग दर्ज है जबकि पंजीकरण में खसरा संख्या-716, ग्राम मगरासा का उल्लेख किया गया।
समिति ने इसके साथ एक और फर्म के लिए एक ही प्लांट के कूटरचित अभिलेख इस्तेमाल किए जाने की आशंका जताई है। नगर निगम की नोटशीट में 60-80 टीपीएच जबकि इनवॉइस में 40-50 टीपीएच क्षमता दर्ज है। इसी तरह आईजे टाइल्स इंडस्ट्रीज और जय श्रीहरि ट्रेडर्स के मामलों में तीन वर्ष की ऑडिट रिपोर्ट, बैलेंस शीट, बैंक स्टेटमेंट, आयकर विवरण और 50 किमी की परिधि में हॉट मिक्स प्लांट होने के प्रमाण पत्र नहीं मिले।
प्रमाण पत्र थे नहीं पर पंजीकरण रिन्यू कर दिया
फर्म अजय कुमार बाजपेई के पंजीकरण का रिन्यूवल चरित्र, हैसियत और प्रदूषण प्रमाण पत्र की वैधता खत्म होने से पहले नए प्रमाण पत्र देने की शर्त पर किया गया था। निर्धारित समय में प्रमाण पत्र उपलब्ध नहीं कराए गए, फिर भी तत्काल पंजीकरण निरस्त नहीं हुआ। करीब एक साल बाद 23 अगस्त 2026 को नोटिस जारी कर फर्म को ब्लैकलिस्ट किया गया। समिति ने इसे विभागीय स्तर पर लापरवाही माना है।
