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नगर निगम में कर्मचारी संघर्ष समिति का शक्ति प्रदर्शन
– फोटो : अमर उजाला
नगर निगम में महापौर प्रमिला पांडेय और नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय के बीच छिड़ी अधिकारों की लड़ाई में अब कर्मचारी भी उतर आए हैं। शनिवार को नगर निगम कर्मियों ने शक्ति प्रदर्शन किया और पार्षदों की ओर से कार्यकारिणी की बैठक में नगर आयुक्त के खिलाफ लाए जाने वाले निंदा प्रस्ताव की भर्त्सना की। चेतावनी दी कि अधिकारियों, कर्मचारियों के मान-सम्मान पर चोट बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
महापौर के समर्थन में उनकी कार्यकारिणी के सदस्यों सहित 30 से अधिक पार्षद हैं तो नगर आयुक्त के समर्थन में कर्मचारी आ गए हैं। शनिवार को संयुक्त कर्मचारी संघर्ष समिति के बैनर तले कर्मचारी संगठनों के अध्यक्षों और महामंत्रियों ने बैठक की। नगर आयुक्त को ज्ञापन देकर कार्यकारिणी में लाए जाने वाले निंदा प्रस्ताव पर विरोध जताया। कर्मचारी नेताओं ने कहा कि नगर निगम के अधिकारी और कर्मचारी शहर की व्यवस्थाएं बेहतर बनाने के लिए दिन-रात काम कर रहे हैं। ऐसे में उनके मान-सम्मान को ठेस पहुंचाने वाली कार्रवाई स्वीकार नहीं की जाएगी। कहा कि नगर निगम में अधिकारी, कर्मचारी और जनप्रतिनिधि आपसी समन्वय से काम करें। इस दौरान नगर निगम कर्मचारी संघ के महामंत्री रमाकांत मिश्रा, हरिओम वाल्मीकि, कमरुद्दीन आदि मौजूद रहे।
बैठक छोड़कर चले गए थे नगर आयुक्त
कन्वेंशन सेंटर के टेंडर, मंगल भवन की समितियां भंग करने और पार्षदों को हॉट मिक्स प्लांट की समितियों से हटाने पर महापौर प्रमिला पांडेय कार्यकारिणी की बैठक में नगर आयुक्त से जवाब की मांग पर अड़ी हैं। नगर आयुक्त लगातार एजेंडे पर बात करने का हवाला देकर जवाब नहीं दे रहे हैं। चौथी बार 28 अक्तूबर को हुई कार्यसमिति की बैठक में 12 सदस्यों ने नगर आयुक्त के खिलाफ निंदा प्रस्ताव लाने की तैयारी की थी। बैठक शुरू हुई तो महापौर दो अधिवक्ता साथ लेकर बैठ गईं जिस पर नगर आयुक्त ने कड़ी नाराजगी जताई और बोले-किसी बाहरी के सामने कोई जवाब नहीं दूंगा। इसके बाद वह अपने अधिकारियों संग बैठक छोड़कर चले गए और मात्र 15 मिनट में ही बैठक खत्म हो गई। इसके बाद ही पार्षदों ने विरोध-प्रदर्शन किया और मामले को मुख्यमंत्री तक ले जाने का ऐलान किया।

