सजायाफ्ता पूर्व भाजपा विधायक कुलदीप सेंगर प्रकरण की दुष्कर्म पीड़िता ने पिता की हत्या में कुलदीप सेंगर को मिली दस साल की सजा बढ़ाने की अपील की थी। दिल्ली उच्च न्यायालय की ओर से अपील खारिज करने पर पीड़िता ने अपनी बात रखी है। उनका कहना है कि 1945 दिन की देरी मेरी तरफ से नहीं सीबीआई की तरफ से की गई है, इसकी सजा मुझे क्यों मिल रही है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में अपील की बात कही है।
पीड़िता ने वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया है। बताया कि पुलिस हिरासत में पिता की बेरहमी से पीटकर हत्या की गई थी। इस मामले में सजा बढ़ाने की मेरी अपील को इसलिए रद्द कर दिया गया क्योंकि इसे दायर करने में 1945 दिन की देरी हुई। पीड़िता का कहना है कि जुलाई 2019 में रायबरेली जाते समय एक्सीडेंट उनका एक्सीडेंट हुआ था। हादसे में मेरे वकील, मौसी और चाची की मौत हो गई थी।
वह (पीड़िता) वेंटिलेटर पर जिंदगी और मौत से जूझ रही थी। मेरी पैरवी करने वाले चाचा को जेल भी जेल भेजवा दिया गया था। पैरवी करने वाला कोई नहीं था। ठीक होने में वक्त लगा और तब वह मानसिक और शारीरिक रूप से कमजोर थी। इसके बाद शादी व दो बच्चे हुए। इन हालात में केस की तारीख पर पहुंचना भी आसान नहीं था। उनका कहना है कि यह सवाल सीबीआई से होना चाहिए कि उसने समय रहते अपील क्यों नहीं की। पीड़िता का कहना है कि कहीं यह कुलदीप सेंगर को कानूनी लाभ देने की साजिश तो नहीं थी। पीड़िता ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर करने की बात कही है।