आगरा में 20 साल पहले फव्वारा बाजार में दुकानों के निर्माण के दाैरान सरकारी जमीन पर अतिक्रमण करके दुकानें बना ली गईं। इस मामले में आरोपी बिल्डर को तत्कालीन विजिलेंस के विवेचक ने मृत दर्शा दिया। बिना भाैतिक सत्यापन किए अपनी रिपोर्ट भी लगा दी। केस से आरोपी का नाम निकालकर अन्य के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल कर दिया। 9 साल पहले विवेचक सेवानिवृत्त भी हो गए। दो साल पहले वर्तमान में केस की विवेचना कर रहे विवेचक को आरोपी बिल्डर के जीवित होने की जानकारी मिली। इस पर विजिलेंस के सेवानिवृत्त निरीक्षक जांचकर्ता अभय सिंह के खिलाफ थाना विजिलेंस, आगरा सेक्टर में प्राथमिकी दर्ज की गई है।
विजिलेंस के मुताबिक, वर्ष 2004 में फव्वारा बाजार में दो दर्जन से अधिक दुकानें बनाई गईं, इनमें से कुछ दुकान निगम की जमीन पर बना दी गई। फर्जी दस्तावेज भी लगाए गए। निगम प्रशासन ने शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं की। इसके बाद मामले की शिकायत शासन तक पहुंची। इस पर विजिलेंस को जांच के आदेश किए गए। मामले की पुष्टि होने पर विजिलेंस के निरीक्षक योगेंद्र सिंह मलिक ने थाना कोतवाली में वर्ष 2006 में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, धोखाधड़ी, षड्यंत्र आदि धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कराई। इसमें 18 आरोपी बनाए गए इनमें बिल्डर सहित नगर निगम, आगरा विकास प्राधिकरण के कर्मचारी भी शामिल थे।
प्रकरण में नूरी दरवाजा निवासी बिल्डर देवेंद्र अग्रवाल भी आरोपी था। केस की विवेचना विजिलेंस के तत्कालीन निरीक्षक अभय सिंह कर रहे थे। उन्होंने वर्ष 2015 में शासन को रिपोर्ट दी। एफआईआर में क्रमांक संख्या 18 पर आरोपी बनाए गए देवेंद्र अग्रवाल की मृत्यु हो जाना दर्शाया। हालांकि शासन से संस्तुति नहीं मिली। इसकी विवेचना जारी रही। दो साल पहले वर्तमान विवेचक को जानकारी मिली कि देवेंद्र अग्रवाल जीवित हैं।
वर्तमान और मूल पते पर जाकर नहीं ली जानकारी
विवेचना में सामने आया कि तत्कालीन निरीक्षक ने आरोपी के वर्तमान और मूल पते पर जाकर कोई जानकारी नहीं ली। पड़ोसियों सहित अन्य लोगों से भी पूछताछ नहीं ली गई। नगर निगम के अमीन कैलाश नारायन का बयान दर्ज किया। किसी अन्य के बयान नहीं लिए। आरोपी के मृत होने के संबंध में कोई साक्ष्य भी नहीं लिए। देवेंद्र के परिजन और रिश्तेदार से कोई साक्ष्य भी नहीं लिया। अमीन के बयान की पुष्टि भी नहीं की। मृत्यु प्रमाण पत्र और श्मशान की रसीद भी नहीं ली। इस कारण विवेचना में देरी हुई।
दो साल पहले आरोपी के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल
एसपी विजिलेंस आलोक शर्मा ने बताया कि तत्कालीन विवेचक अभय सिंह ने विवेचना में घोर लापरवाही की। वह 28 फरवरी 2017 को सेवानिवृत्त हो गए थे। वह आरके पुरम, ताजनगरी फेज-2 के रहने वाले हैं। उनके खिलाफ लापरवाही पर प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। विवेचना के आधार पर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उधर, आरोपी देवेंद्र के खिलाफ भी साक्ष्य संकलन कर आरोपपत्र कोर्ट में दाखिल कर दिया गया।
