सोने के आयात पर लगाम लगाने के लिए प्रस्तावित गोल्ड मोनेटाइजेशन 2.0 स्कीम से सराफा कारोबारियों में नई उम्मीद जगी है। सराफा संगठनों का कहना है कि इसके जरिये घरों में पड़ा सोना बाजार में आएगा। इससे सरकार का आयात बिल घटेगा, कारोबारियों को कच्चा सोना मिलेगा और ग्राहकों को पुराने गहनों का अच्छा मूल्य मिलेगा।

कारोबारियों के मुताबिक उत्तर प्रदेश के घरों में 4500 टन से ज्यादा सोना है। सही व्यवस्था बनने पर शुरुआती चरण में 200 टन सोना बाजार में लाया जा सकता है। ऑल इंडिया ज्वेलर्स एंड गोल्डस्मिथ फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष पंकज अरोड़ा ने कहा कि सोने का आयात घटाने के लिए कस्टम शुल्क बढ़ाया गया है। पीएम नरेंद्र मोदी की अपील का असर भी दिखा है।

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अरोड़ा ने कहा कि अगर घरों में पड़े सोने को औपचारिक व्यवस्था से जोड़ दिया जाए तो देश को बड़ा फायदा हो सकता है। इस संबंध में एक प्रस्ताव केंद्र को सौंपा गया है। हालांकि, अभी तक सरकार ने कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है। 

संगठन के राष्ट्रीय सचिव राजीव रस्तोगी के मुताबिक ग्राहक सीधे बैंक तक अपने गहने ले जाने में सहज नहीं थे। इसलिए पुरानी स्कीम सफल नहीं हुई। नई योजना के प्रस्ताव में ग्राहक पुराने गहने लेकर भरोसेमंद सराफ के पास जाएगा। सराफ उसे बताएगा कि पुराने डिजाइन अब चलन में नहीं हैं। उन्हें गलाकर शुद्ध सोना निकाला जा सकता है। इसके बाद गहनों की शुद्धता तय कर बैंक में जमा कराए जाएंगे।

ग्राहक और अर्थव्यवस्था दोनों को फायदा: सराफ सागर केसरवानी कहते हैं कि नई पीढ़ी पुराने डिजाइन के गहने कम पहनती है। उन्हें नए डिजाइन पसंद आते हैं। ऐसे में पुराने गहने घरों में बेकार पड़े रहते हैं। अगर इनको मोनेटाइजेशन स्कीम से जोड़ा जाए तो ग्राहक को नए डिजाइन के गहने मिलेंगे और सोना अर्थव्यवस्था का हिस्सा बनेगा।



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