उत्तर प्रदेश ने घरेलू पर्यटन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज की है। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) के घरेलू पर्यटन व्यय सर्वेक्षण में यूपी ने घरेलू ओवरनाइट ट्रैवल की दोनों प्रमुख श्रेणियों में देश में सबसे अधिक हिस्सेदारी दर्ज की है। तीर्थ यात्रा के लिए पहले से मजबूत पहचान रखने वाला उत्तर प्रदेश अब विरासत, ग्रामीण पर्यटन, प्रकृति, स्थानीय खानपान और सांस्कृतिक अनुभवों को भी पर्यटन की नई ताकत के रूप में विकसित कर रहा है। 

सर्वे के अनुसार 365 दिन की अवधि में तीर्थ, छुट्टी, स्वास्थ्य और खरीदारी जैसे प्रमुख उद्देश्यों से होने वाली रात्रि यात्राओं में यूपी की हिस्सेदारी 15.7 फीसदी रही, जो तमिलनाडु के 13.4 और राजस्थान के 8 फीसदी से अधिक है। वहीं कारोबार, सामाजिक यात्रा, शिक्षा-प्रशिक्षण और अन्य उद्देश्यों वाली पिछले 30 दिनों की रात्रि यात्राओं में भी यूपी 15.5 फीसदी हिस्सेदारी के साथ पहले स्थान पर रहा। इस श्रेणी में बिहार 10.5 और तमिलनाडु 9.6 फीसदी के साथ पीछे रहे।

सर्वे में दर्ज दोनों आंकड़े राज्य के भीतर और दूसरे राज्यों से आने वाले यात्रियों को मिलाकर हैं। यानी उत्तर प्रदेश की पर्यटन क्षमता केवल धार्मिक यात्राओं तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि अलग-अलग जरूरतों और उद्देश्यों से होने वाली यात्राओं में भी राज्य की मजबूत मौजूदगी सामने आई है। 365 दिन वाली श्रेणी में तीर्थ, अवकाश, स्वास्थ्य और खरीदारी जैसी यात्राएं शामिल थीं, जबकि 30 दिन वाली श्रेणी में कारोबार, सामाजिक मेलजोल, शिक्षा, प्रशिक्षण और अन्य उद्देश्यों से की गई यात्राओं को देखा गया। 

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश में बेहतर कानून-व्यवस्था, तेजी से बढ़ते एक्सप्रेसवे और हवाई अड्डों के नेटवर्क तथा मजबूत रेल कनेक्टिविटी से उत्तर प्रदेश की यात्रा अब और आसान हुई है। इससे पर्यटकों का भरोसा भी मजबूत हुआ है। उन्होंने बताया प्रदेश सरकार का प्रयास है कि बेहतर कनेक्टिविटी को ऐसे पर्यटन अनुभवों से जोड़ा जाए, जिससे देश-विदेश से आने वाले पर्यटक उत्तर प्रदेश के अधिक से अधिक हिस्सों को जानने और देखने के लिए प्रेरित हों।

पर्यटन नीति-2022 के तहत प्रदेश में 12 थीमैटिक सर्किट के जरिए अलग-अलग पर्यटन स्थलों को जोड़ने का काम किया जा रहा है। अयोध्या, वाराणसी और प्रयागराज को जोड़ने वाला स्पिरिचुअल ट्रायंगल इसका प्रमुख उदाहरण है। इसके साथ ही बाबा नीब करौरी सर्किट जैसे नए मार्गों के जरिए फिरोजाबाद, फर्रुखाबाद, लखनऊ और वृंदावन जैसे स्थलों को भी एक पर्यटन अनुभव से जोड़ने की कोशिश की जा रही है। विंध्य धाम, चित्रकूट, नैमिषारण्य, देवीपाटन और मां शाकुंभरी देवी जैसे क्षेत्रों में समर्पित तीर्थ विकास परिषदों के माध्यम से योजनाबद्ध विकास को आगे बढ़ाया जा रहा है। विभाग के अनुसार वर्ष 2017 से अब तक प्रदेश में 3,000 से अधिक पर्यटन परियोजनाएं करीब 10,000 करोड़ रुपये की लागत से शुरू की गई हैं।



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