बदायूं में हुआ भीषण सड़क हादसा डालचंद्र के परिवार को जिंदगीभर का गम दे दिया। एक ही परिवार की चार महिलाओं की मौत ने पूरे कुनबे को झकझोर दिया है। हादसे ने परिवार की रीढ़ मानी जाने वाली महिलाओं को ही छीन लिया। अब परिवार के सामने सिर्फ अपनों को खोने का दुख ही नहीं, बल्कि शादी की रस्मों को पूरा करने की चुनौती भी खड़ी हो गई है।  

एक साल पहले बनी थी दुल्हन, अब उठी अर्थी

एक साल पहले डालचंद्र के दूसरे नंबर के बेटे भोजराज से शादी कर डोली में बैठकर आई सरला भी देवर कुमरपाल की शादी को लेकर बहुत उत्साहित थीं, लेकिन शादी के एक साल बाद ही अब सरला की अर्थी उठेगी। 




Budaun Accident Two tractors racing on highway ran over e-rickshaw accident left family with lifetime of grief

हादसे के बाद मुरावननगला मोहल्ले की गली में पसरा सन्नाटा।
– फोटो : संवाद


तीन बच्चों के सिर से उठा गया मां का साया

हादसे में डालचंद्र की बेटी नारायणी देवी की भी मौत हो गई। नारायणी देवी की शादी कासगंज जिले के सोरों थाना क्षेत्र के गुलाबगढ़ी में हुई थी। उसके तीन बच्चे हैं। हादसे में नारायणी देवी की मौत होने के बाद तीनों बच्चों के ऊपर से मां का साया उठ गया। बच्चे अभी यह समझ भी नहीं पा रहे हैं कि उनकी मां अब कभी लौटकर नहीं आएगी। 

 


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राजकीय मेडिकल कॉलेज में मृतकों और घायलों की जानकारी करती पुलिस
– फोटो : संवाद


डालचंद्र के बड़े बेटे वीरपाल की पत्नी गंगाश्री उर्फ आरती की भी हादसे में जान चली गई। उनके दो बेटे हैं। दोनों बच्चों की पढ़ाई और परवरिश को लेकर अब गंभीर चिंता बन गई है। बच्चे अपनी मां के बारे में पूछ रहे हैं तो वहां मौजूद हर किसी के आंखों के आंसू नहीं रुक रहे हैं। 


Budaun Accident Two tractors racing on highway ran over e-rickshaw accident left family with lifetime of grief

इसी ट्रैक्टर से हुआ हादसा
– फोटो : संवाद


घटनास्थल पर पड़ी रह गई ढोलक  

भात की रस्म पूरी करने के लिए ई-कार्ट से जाते वक्त राजकुमारी गोद में रखकर ढोलक बजा रही थीं। हादसे के बाद वह ढोलक उनके शव के पास पड़ी दिखी।


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उझानी सीएचसी में पुलिस और पीड़ित परिजन।
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मंगल गीत नहीं अब रुदन… शहनाइयों की जगह गूंज रहीं सिसकियां

बदायूं के उझानी के कछला के मुरावन नगला निवासी डालचंद्र के जिस घर से 12 दिन बाद शहनाइयों की गूंज के साथ बेटे कुमरपाल की बरात जानी थी, हादसे के बाद वहां सिसकियां गूंज रही हैं। खुशियों की जगह मातम पसरा है। मंगल गीतों की जगह करुण क्रंदन गूंज रहा है। भात मांगने की रस्म भी अधूरी रह गई। भीषण हादसे में कुमरपाल की मां, बहन, दो भाभियों समेत छह महिलाओं की मौत से हर कोई स्तब्ध है। मोहल्ले की गलियों में सन्नाटा छाया हुआ है।

 




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