जमीन एक, मगर सौदे अनेक हुए। कभी इकरारनामा तो कभी पावर ऑफ अटॉर्नी। अलग-अलग लोगों से रकम भी ली गई। फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र और नामांतरण का खेल भी सामने आया। बोदला में बैनारा फैक्टरी के पास करोड़ों की 10 हजार वर्ग गज जमीन के मामले में सीआईडी जांच ने फर्जीवाड़े की नई परतें खोली हैं। तीन नए मुकदमे दर्ज हो चुके हैं, मगर ढाई साल बाद भी जांच पूरी नहीं हुई है।
सीआईडी के निरीक्षक अनिल प्रताप सिंह ने जांच में सामने आए लुधियाना, पंजाब निवासी टहल सिंह पर जुलाई में पहली प्राथमिकी दर्ज कराई। आरोप लगा कि टहल सिंह ने यह जानते हुए कि जमीन डीड के अनुसार पदम कुमार जैन को दे चुके हैं। लाभ उठाने के लिए बार-बार बेचा।
नगर निगम से हुआ था नामांतरण
मिल बंद होने के बाद 31 मार्च, 1980 को डीड ऑफ डिसाॅल्यूशन की गई। इसमें ऑयल इंजन मशीनरी आदि टहल सिंह के परिवार को मिली। उनके हिस्से की रकम भी उन्हें दी गई। नामांतरण के लिए अमर सिंह और टहल सिंह ने 1 मई, 1980 को निगम में प्रार्थनापत्र दिया। जमीन 8 दिसंबर, 1980 को पदम कुमार जैन आदि के नाम अंकित कर दी गई।
इनको भी बेची टहल सिंह ने जमीन
– 5 नवंबर, 2007 को अपने साले जसवीर सिंह के नाम लुधियाना, पंजाब में पावर ऑफ अटाॅर्नी कर 5 दिसंबर को निरस्त करा दिया। जसवीर ने 6 दिसंबर को दिल्ली के शांता कुमार के नाम 10 लाख रुपये लेकर अनुबंध कर दिया।
– 24 जनवरी 2014 को टहल सिंह ने 50 लाख रुपये में फिर साैदा कर पांच लाख रुपये ले लिए। इस बार मैनपुरी निवासी बलवीर सिंह, विनीत यादव, अजय यादव के साथ इकरारनामा कर लिया।
– 6810 वर्ग मीटर जमीन की कीमत 7.49 करोड़ रुपये दर्शाते हुए एक करोड़ रुपये में ओरियंट इंफ्राटेक एलएलपी भागीदार मैनपुरी निवासी त्रियांशु यादव को 18 नवंबर 2016 को बैनामा कर दिया।
– 18 अक्तूबर 2024 को 1.15 करोड़ रुपये में इकरारनामा कर 10 लाख बयाना लिया। विनय पाटनी, साैरभ जसोदिया, राजीव यादव, रविंद्रपाल सिंह और सुरेंद्र सिंह चाैहान उर्फ बिल्लू के नाम नोटरी की। पता चलने पर प्रमोद कुमार जैन ने सिविल वाद किया।
