नगर निगम के खाते में पड़े 23.17 करोड़ रुपये शासन ने वापस ले लिए हैं। खाते में पैसा पड़े रहने के बाद दो महीने तक नगर निगम की ओर से न तो डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण करने वाली बकायेदारी का भुगतान किया जा सका और न ही कामों के प्रस्ताव तैयार हुए। जबकि पार्षदों की ओर से लगातार विकास कार्यों से जुड़े प्रस्ताव दिए जा रहे हैं।
वित्तीय वर्ष 2025-26 में बीती जनवरी में 15वें वित्त के तहत नगर निगम को 23.17 करोड़ रुपये की दूसरी किस्त मिली थी। बताया गया कि 15वें वित्त आयोग की शर्तों के मुताबिक टाइड फंड को सिर्फ सफाई कार्यों में खर्च किया जा सकता है। जबकि अनटाइड फंड में मिले पैसे से नगर निगम अवस्थापना संबंधी कार्य करवाता है। ऐसे में 9.27 करोड़ रुपये सड़क, नाला-नाली आदि के निर्माण पर खर्च होते थे। वहीं 13.90 करोड़ सफाई जैसी मूलभूत सहूलियतों पर खर्च किए जाने थे। इस बजट को खर्च करने के लिए समिति बनी हुई है, जिसके अध्यक्ष मेयर होते हैं। बताया गया कि कामों के प्रस्ताव तो बने। साथ ही कचरा संग्रहण करने वाली फर्म के बकाये के भुगतान के लिए भी फाइल बन गई लेकिन समिति की स्वीकृति न मिल पाने से बजट खर्च नहीं हो सका। वित्तीय वर्ष समाप्त होने पर भी बजट खर्च न हो पाने से शासन ने वापस ले लिया। जब निगम प्रशासन को इसकी जानकारी हुई तो फिर से शासन स्तर पर वार्ता शुरू हुई। नगर आयुक्त आकांक्षा राणा का कहना है कि जल्द ही बजट मिलने की उम्मीद है। बजट आते ही नियमानुसार भुगतान और विकास कार्य करवाए जाएंगे।
फिर गहराया सीएनजी संकट, ठप हो सकता है कूड़ा उठान
कचरा संग्रहण करने वाली फर्म को नगर निगम ने बीते नौ महीने से भुगतान नहीं किया है। ऐसे में निगम पर करीब 20 करोड़ की उधारी हो गई है। बकायेदारी बढ़ने से फर्म की ओर से भी पेट्रोल पंपों को डीजल और सीएनजी का भुगतान नहीं किया गया है। निगम प्रशासन के कहने पर ही पंपों की ओर से डीजल और सीएनजी डाली जा रही है लेकिन पंप संचालक ने रविवार से सीएनजी देने से इन्कार कर दिया है। अगर आज सुबह वाहनों में सीएनजी नहीं डली तो शहर के कई इलाकों में कूड़ा उठान ठप हो सकता है।
