डीजीसी ने बताया कि इस केस में 54 दिन की जांच के बाद पुलिस ने लगभग 1000 पेज का आरोप-पत्र न्यायालय में दाखिल किया था। 22 गवाहों ने न्यायालय में बयान दर्ज कराए थे। अब 590 दिन बाद दोनों दोषियों को सजा सुनाई गई है। जिला जज ने मृत्युदंड के आदेश में महाभारत के निर्वनो वध्यते व्याघ्रो निर्व्याघ्रं छिद्यते वनम्। तस्माद्व्याघ्रो वनं रक्षेद्वनं व्याघ्रं च पालयेत्॥ श्लोक का जिक्र किया। यह श्लोक विदुर ने धृतराष्ट्र से कहा था।
जिला जज ने आदेश में लिखा है कि सौरभ अपनी पत्नी मुस्कान और बेटी के बेहतर भविष्य के लिए लंदन में नौकरी करने गया था। वह वहां से पत्नी को रुपये कमाकर भेजता था। उसकी पत्नी उसे धोखा देकर उसके रुपयों को अपने शौक में खर्च करती थी। उसने पति को धोखा देकर साहिल से संबंध बना लिए। इसके बाद उसकी हत्या की और शव के क्रूरता से टुकड़े कर नीले ड्रम में सीमेंट से चिन दिए। इसके बाद वह हिमाचल प्रदेश घूमने गए और वहां मौज-मस्ती करते रहे।
दोनों बेटियों का हवाला देकर रहम की अपील
बुधवार को जिला जज ने सजा सुनाने से पहले मुस्कान और साहिल से पूछा कि उन्हें कुछ कहना है। तब मुस्कान ने अपनी दोनों बेटियों के भविष्य का हवाला देते हुए रहम की अपील की। इस दौरान अभियोजन पक्ष और बचाव पक्ष के वकील की लगभग 45 मिनट बहस हुई। बचाव पक्ष ने अपनी दलील में उसके माता-पिता का भी हवाला दिया। अभियोजन पक्ष ने कहा कि जेल जाने के बाद अब तक मुस्कान को अपनी बड़ी बेटी या माता-पिता का ख्याल नहीं आया था। अब मौत की सजा के डर से उसे उनका ख्याल आ रहा है।
डीजीसी ने कहा कि साहिल शुक्ला की उम्र लगभग 28 वर्ष है। उसकी शिक्षा स्नातक है परंतु वर्तमान में उसका व्यवसाय और आय शून्य है। अभियुक्त मुस्कान रस्तोगी भी लगभग 28 वर्ष की है। उसकी शिक्षा कक्षा 8वीं तक है और उसकी भी आय व रोजगार शून्य है। कहा कि सौरभ की हत्या शातिर और सुनियोजित ढंग से की गई। दोषियों ने सौरभ की हत्या के बाद भी क्रूरता नहीं छोड़ी। उन्होंने मृतक के शव के हाथ कलाई से और सिर धड़ से अलग कर दिए। हत्या के बाद शव को तकिये के कवर में रखकर अपने साथ ले गया था और फिर मुस्कान के घर लाया था।
जेल में रहने के दौरान नहीं दिखा पश्चाताप
डीजीसी ने बताया कि उन्होंने दलील दी कि जेल में डेढ़ वर्ष से अधिक रहने के बावजूद दोनों दोषियों में कोई पश्चाताप नहीं दिखा। उनका आचरण सामान्य रहा। जघन्य कृत्य को लेकर कोई उनमें अपराध बोध नहीं है। वे किसी रचनात्मक या समाजोत्थान के कार्य में संलिप्त नहीं रहे। उनकी मानसिकता खतरनाक और सुनियोजित पाई गई है, जिससे भविष्य में उनके समाज के लिए खतरा न बनने की कोई संभावना नहीं दिखती।




